छत्तीसगढ़ लघु वनोपजों के मामले में समृद्ध राज्य – मुख्यमंत्री बघेल

मुख्यमंत्री ने 8 लाख से अधिक तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 71 करोड़ रूपए के प्रोत्साहन पारिश्रमिक का किया वितरण लघु वनोपजों के संग्रहण में विगत दो वर्षों से छत्तीसगढ़ देश में अव्वल

रायपुर, 11 अक्टूबर 2021:मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज राजधानी स्थित अपने निवास कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य में वर्ष 2019 के तेंदूपत्ता सीजन में लाभ में रहीं 595 समितियों के 8 लाख 34 हजार 706 संग्राहकों को 70 करोड़ 88 लाख रूपए के प्रोत्साहन पारिश्रमिक का वितरण किया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 के सीजन के लिए भी 728 समितियों के 11 लाख 48 हजार 528 संग्राहकों को 232 करोड़ रूपए के राशि का भुगतान ऑनलाईन माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में पिछले साल किया गया था। उन्होंने इस दौरान दूरस्थ सुकमा आदि वनमंडलों के तेंदूपत्ता संग्राहकों से बात-चीत कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।

मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ लघु वनोपजों के मामले में एक समृद्ध राज्य है और विभाग के कुशल क्रियान्वयन से हमारा राज्य लघु वनोपजों के संग्रहण में विगत दो वर्षों से देश में लगातार अव्वल बना हुआ है। उन्होंने इनमें वन विभाग के कार्यों और समन्वित प्रयास के साथ भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके फलस्वरूप विभाग के प्रति पहले की तुलना में वनवासियों तथा आम आदमी का अधिक जुड़ाव संभव हो पाया है, जो सराहनीय है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में 13 लाख से अधिक परिवारों को तेंदूपत्ता संग्रहण से और 6 लाख से अधिक परिवारों को लघु वनोपज संग्रहण से आय होती है। हमने राज्य में वनवासियों के हित में अहम निर्णय लेते हुए तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 2500 रूपए मानक बोरा से बढ़ाकर 4000 रूपए मानक बोरा कर दिया था। राज्य सरकार के इस निर्णय से वर्ष 2019 में 13 लाख 51 हजार 771 परिवारों को 225 करोड़ 75 लाख रूपए की अतिरिक्त आय तेंदूपत्ता संग्रहण के समय ही प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में कोरोना की कठिन परिस्थितियों में तेंदूपत्ता संग्रहण का काम सुचारू रूप से चलता रहा। इस दौरान 12 लाख 14 हजार 372 संग्राहकों से 13 लाख 170 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण किया गया। इसके एवज में संग्राहकों को 520 करोड़ 07 लाख रूपए का भुगतान किया जा रहा है। राज्य सरकार ने कोरोना के कठिन समय में भी संग्राहकों को न केवल संग्रहण राशि का भुगतान किया, बल्कि उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

इसी प्रकार राज्य में लघु वनोपजों के वेल्यू एडिशन और उत्पादों के मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए संग्राहकों की आय में बढ़ोतरी के लिए कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में 139 वन धन केन्द्रों में से 50 वन धन केन्द्रों में 121 प्रकार के हर्बल उत्पाद तैयार कर ’छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड’ के नाम से संजीवनी केन्द्रों द्वारा बेचा जा रहा है। वर्ष 2019-20 में 124 लाख 48 हजार रूपए तथा वर्ष 2020-21 में 281 लाख 59 हजार रूपए के उत्पादों की बिक्री संजीवनी केन्द्रों के माध्यम से की गई। अब 2021-22 से इन उत्पादों की बिक्री खुले बाजार में भी की जाएगी। ऑनलाईन बिक्री के लिए अमेजन इंडिया से भी एमओयू किया गया है।
मुख्यमंत्री बघेल ने बताया कि तेंदूपत्ता तथा लघु वनोपजों के संग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए 52 प्रकार के लघु वनोपजों का समर्थन मूल्य घोषित करते हुए उनके संग्रहण, प्रसंस्करण एवं मार्केटिंग का काम छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से किया जा रहा है।

राज्य में वर्ष 2020-21 में 4 हजार 337 स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 158 करोड़ 54 लाख रूपए के लघु वनोपजों की खरीदी की गई। इसी प्रकार कोदो, कुटकी, रागी का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करते हुए उनकी भी खरीदी करने का निर्णय शासन ने लिया है। आगामी सीजन में कोदो एवं कुटकी की खरीदी 3000 रूपए प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी।
इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य में लघु वनोपजों का संग्रहण आदिवासी-वनवासी सहित संग्राहकों के लिए आय का महत्वपूर्ण जरिया है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य में उनके हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में उद्योग मंत्री कवासी लखमा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुकमा से जुड़े हुए थे। इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव वन मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी तथा संजय शुक्ला और कैम्पा समिति से जी.एस. धनंजय, पंकज बांधव, वशिउल्ला शेख, मती लक्ष्मी साहू, एम.सूरज तथा अपर प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ एस.एस. बजाज, कैम्पा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी व्ही. निवास राव उपस्थित थे।

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