छत्तीसगढ़: बेहतर ग्रेडिंग के लिए पांच गांवों को गोद लेकर रिसर्च करना अनिवार्य

इसकी पहल छत्तीसगढ़ में सभी विवि ने शुरू कर दी है।

छत्तीसगढ़ के तमाम विश्वविद्यालयों के लिए पांच-पांच गांवों को गोद लेकर रिसर्च करना अनिवार्य कर दिया गया है। बेहतर ग्रेडिंग के लिए गांवों की समस्याओं पर आधारित रिसर्च प्राथमिकता है।

सभी विवि सामाजिक समस्याओं पर केंद्रित रिसर्च करेंगे। नई शिक्षा नीति दिसम्बर 2018 तक लांच होगी। इसमें गांवों में समस्याओं पर रिसर्च करना अनिवार्य किया जाएगा। इसकी पहल छत्तीसगढ़ में सभी विवि ने शुरू कर दी है।

पंडित रविशंकर शुक्ल विवि ने राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत छात्रों के साथ मिलकर पांच ऐसे गांव चुनने के निर्देश दिए हैं जो सुविधाविहीन हों। जहां सरकारी योजनाएं नहीं पहुंच पा रही हों। गांवों में न सिर्फ साइंटिफिक बल्कि सोशल रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा।

लघु, सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को खंगालने के लिए न सिर्फ विवि की अध्ययनशालाओं से बल्कि कॉलेजों से भी शोधार्थी पहुंचेंगे। सोशल रिसर्च को सरकार को भी सौंपा जाएगा। खामियों पर चर्चा की जाएगी। पॉलिसी बनाने के लिए ये रिसर्च भी कारगर होंगे।

प्रदेश में पंडित रविशंकर शुक्ल विवि, सरगुजा विवि, दुर्ग विवि, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि, बिलासपुर विवि, बस्तर विवि आदि विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को सीधे गांवों से जोड़ा जा रहा है।

संत गहिरागुरु विवि सरगुजा ने छह गांव गोद लेकर काम शुरू कर दिया है। किसानों को फसलों से संबंधित जानकारी दे रहे हैं। उनकी समस्याओं पर रिसर्च हो रहा है। बालक- बालिकाओं को समान रूप से स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

मामले में विवि प्रबंधन ने बताया कि प्रोफेसर के साथ रिसर्च स्कॉलर इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कुलपति डॉ. रोहिणी प्रसाद ने बताया कि गांव के स्कूलों में पंखा लगवाया। फैकल्टीज के माध्यम से स्कूलों में तरह-तरह की गतिविधियां भी कराई जा रही है। हाल ही में विवि में नैक की विजिट के दौरान भी विवि ने यहां गांवों में हो रहे रिसर्च से अवगत कराया।

कृषि विवि के कुलपति ने पहले ही कर रखी है पहल

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के अंतर्गत कृषि महाविद्यालय के चतुर्थ वर्ष के सभी छात्रों को खेती-किसानी के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है। उन्हें फसल संबंधी दिक्कतों, बेहतर पैदावार के बारे में किसानों के माध्मय से बताया जा रहा है।

इस प्रोगाम के तहत छात्रों को कृषकों के साथ कतार बोनी, संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग, फसलचक्रतथा अजोला उत्पादन के फायदे बताए जा रहे हैं। खेत की मिट्टी को किस प्रकार से बेहतर पैदावार के लायक बनाया जाए, इसकी भी जानकारी दी जा रही है।

विवि के कृषि विज्ञान केंद्र अधिकारी भी किसान व छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए उपस्थित रहते हैं। रायपुर के आरंग ब्लॉक के ग्राम गोइन्दा में छात्र कृषि की उन्नत तकनीक सीख रहे हैं।

इसके तहत छात्र तीन वर्षों में सैद्धांतिक रूप से किये गए अध्ययन को प्रायोगिक रूप से सीखने के लिए गांव जाकर कृषकों के बीच एक सेमेस्टर रहते हैं। कृषि विवि के कुलपति डॉ. एसके पाटिल के मुताबिक इस प्रोग्राम के दौरान कृषकों को भी बहुत लाभ होता है। कृषकगण छात्रों से कृषि की उन्नत तकनीक सीखते हैं।

बिलासपुर विवि ने लिये पांच गांव गोद

बिलासपुर विवि के कुलपति डॉ. गौरीदत्त शर्मा ने बताया कि बिलासपुर विवि ने पांच गांवों को गोद लिया है। राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत गांवों में सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए काम किया जा रहा है।

प्रक्रिया शुरू हो गई

अब रिसर्च का दायरा हर विवि को गांवों तक बढ़ाना है। रविवि ने भी इसके लिए पांच ऐसे गांवों को चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो सुविधाविहीन हैं, जहां रिसर्च की अपार संभावनाएं हैं। – डॉ. केएल वर्मा, कुलपति, पं. रविवि<>

 

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