छत्तीसगढ़ : गरीबों का मुफ्त में इलाज करने छोड़ा लाखों का पैकेज

खंडहर जैसे अस्पताल में पिछले 18 साल में करीब दस लाख लोगों का इलाज हो चुका है।

छत्तीसगढ़ में एक ऐसा अस्पताल है जहां देश-विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टर लाखों का पैकेज छोड़कर गरीबों का मुफ्त इलाज करते हैं।

बिलासपुर जिले के गनियारी में पिछले 17 साल से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों का उपचार महज दस रुपये की फीस में एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टर करते हैं।

खंडहर जैसे अस्पताल में पिछले 18 साल में करीब दस लाख लोगों का इलाज हो चुका है।

ऐसे शुरू हुई मुहिम

20 साल पहले एम्स में पढ़ रहे चार लड़के और चार लड़कियों ने ग्रामीण आदिवासी इलाके में अपनी सेवा देने का निर्णय लिया।

इन लोगोंं ने गरीबों के मसीहा जर्मन डॉक्टर रूडोल्फ विरको को पढ़ा था और वहीं से इन्हें प्ररेणा मिली थी। इसके बाद इन्होंने ऐसे स्थान की तलाश शुरू की जहां इनकी इच्छा पूरी हो सकती थी।

कई राज्य घूमने के बाद बिलासपुर के पास के गांवों तक पहुंचे तो इन्हें हालात बेहद खराब मिले।

1999 में इन्होेंने गनियारी गांव में सिंचाई विभाग की खंडहर हो चुकी एक कालोनी को अपना ठिकाना बनाया।
इसके लिए सरकार को प्रपोजल भेजा और सिर्फ एक हजार रूपए की लीज पर खंडहर इन्हें मिल गया।

बिना पूरी सुविधा के सभी दोस्तों ने मिल जुलकर सेवा का काम शुरू किया। दो दिन इनके पास कोई नहीं आया पर तीसरे दिन एक बीमार पहुंचा।

वह बहुत बीमार था और उसका वजह सिर्फ 44 किलो रह गया था। वह कहीं से उधार मांगकर एक हजार रूपए लेकर आया था। डॉक्टरों ने उसकी जांच की तो मलेरिया निकला।

उन्होंने उसका इलाज पांच रूपए में कर दिया। बस फिर क्या था, अस्पताल चल निकला और इसका नाम दिया गया जन स्वास्थ्य सहयोग।

आपस में विवाह कर यहीं बस गए

जिन 9 दोस्तों ने इस मुहिम की शुरूआत की थी उसमें से चार ने आपस में विवाह कर लिया है और अब जिंदगी इसी इलाके को सौंप दी है।

इनकी टीम में डॉ. योगेश जैन, डॉ. रचना जैन, डॉ. रमन कटारिया, डॉ अंजू कटारिया, डॉ. अनुराग भार्गव, डॉ. माधवी भार्गव, डॉ. बिश्वरूप चटर्जी, डॉ. माधुरी चटर्जी और डॉ. सी सत्यमाला शामिल हैं।

देश विदेश से मिली मदद

गनियारी के डॉक्टरों ने बताया कि शुरू में पैसे की बड़ी समस्या थी। इन लोगों ने अपने देश विदेश के दोस्तों से इस प्रोजेक्टर के बारे में बताया।

दुनिया भर से मदद ली। मलेरिया इस इलाके की बड़ी समस्या थी। इन लोगों ने मलेरिया पर बहुत काम किया है और आज इसपर काफी हद तक काबू भी पा लिया है।

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