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दो टूक (श्याम वेताल) : छत्तीसगढ़ में मोदी की मोहिनी असर करेगी ?

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों अभी से वोटर तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. भाजपा को जहां 90 में से 65 सीटें जीतने का लक्ष्य मिला है वहीं कांग्रेस 15 साल के वनवास को खत्म करने के लिए पसीना बहा रही है. भाजपा ने पिछले तीनों चुनाव में 50 से अधिक सीटें कभी नहीं हासिल की हैं इसलिए उसे यह लक्ष्य बहुत भारी लग रहा है लेकिन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा दिया गया यह लक्ष्य पूरा करने के लिए संगठन प्राणपण से जुड़ गया है.

इसी क्रम में, संगठन ने सबसे पहले बस्तर को फोकस किया है. संगठन के कई नेता और कार्यकर्ता पूरे बस्तर में डेरा डाल चुके हैं. आये दिन बैठकें, समीक्षाएं और जनसंपर्क चल रहा है. पार्टी एवं संगठन के कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यात्रा से बल मिला है और स्फूर्ति भी आयी है. प्रधानमंत्री ने बीजापुर जिले के ग्राम जांगला में आयुष्मान भारत योजना के शुभारंभ के अवसर पर कहा कि राज्य सही दिशा में प्रगति कर रहा है. इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री रमन सिंह की भी सराहना की. कार्यक्रम के दौरान जब मोदी ने एक महिला को अपने हाथों से चप्पल पहनाई तो यह चित्र राष्ट्रीय अखबारों और चैनलों में छाया रहा. मोदी इसके पहले भी जब छत्तीसगढ़ आए थे तो उन्होंने बकरियां बेचकर टॉयलेट बनाने वाली वृद्ध महिला के पैर छूकर नमन किया था. वह खबर भी सुर्खियों में रही. मोदी की इस विनम्रता ने छत्तीसगढ़वासियों को मुग्ध कर दिया है. भाजपा मोदी की इस ‘मोहिनी – माया’ का लाभ उठाने को तत्पर हैं. बस्तर का भोला-भाला वोटर आगामी चुनाव में मोदी की पार्टी को भूल नहीं पाएगा क्योंकि आदिवासी बहुत भोले होते हैं और उन्हें सम्मान मिले तो वह उस पर मर – मिटते हैं. इसके अतिरिक्त रमन सरकार भी आदिवासियों का पूरा ध्यान रखने की कोशिश कर रही है. उनकी हर मूल जरूरत को पूरा कर रही है. शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी भरपूर काम किया जा रहा है. ऐसी स्थिति में बस्तर की 12 सीटों में से अधिकाधिक सीटें भाजपा की झोली में जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा.

जहां तक राज्य में शहरी इलाकों का प्रश्न है, वहां एंटी इनकंबेंसी लहर चलने के आसार हैं. इसका मुख्य कारण विधायकों और मंत्रियों के प्रति नाराजगी है. लोगों के काम ना होने से असंतोष का माहौल है जो भाजपा को भारी पड़ सकता है.

बहरहाल, अभी समय है, पार्टी ने लोगों की नाराजगी को दूर करने की कोशिश की तो संभव है वोटरों का मिजाज बदले.

उधर, कांग्रेस भी पीछे नहीं है. प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया अपनी टीम के साथ राज्य का कोना – कोना छान रहे हैं. प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल एवं नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंह देव भी पुनिया टीम को पूरी पूरी मदद कर रहे हैं. गांवो में जाकर भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. खास तौर पर उनका फोकस किसानों का कष्ट और युवाओं में बेरोजगारी पर है.

वास्तविकता भी यही है कि राज्य में किसान न खुश है और न संतुष्ट. उसे उसकी फसल का उतना दाम नहीं मिल रहा है जितना उसे मिलना चाहिए. कर्ज के बोझ से झुकते किसान की मदद में राज्य सरकार कंजूस साबित हुई है. इसी तरह युवा वर्ग बेरोजगारी की मार झेल रहा है. उसे अपने राज्य में रोजगार नहीं मिल रहा है, इसलिए उसे बाहर जाना पड़ रहा है. कई युवा ऐसे हैं जो अपना घर छोड़ नहीं सकते इसलिए उन्हें खाली बैठना पड़ रहा है.

कांग्रेस इन मुद्दों पर सरकार को घेरती आ रही है अब चुनाव में वह इस शस्त्र का इस्तेमाल कर भाजपा को पटखनी देने की कोशिश कर रही है. इस बीच, खबर है कि राहुल गांधी भी छत्तीसगढ़ आ रहे हैं. देखना होगा कि वह मोदी की मोहिनी को भंग कर पाएंगे या नहीं.

वैसे, आगामी चुनाव में जोगी जी की पार्टी और आम आदमी पार्टी भी दमखम झोंक रही है. कुछ सीटें तो इनके हिस्से में जरूर आएंगी. लेकिन जोगी की पार्टी जहां कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है वही ‘आप’ दोनों पार्टियों भाजपा एवं कांग्रेस का वजन कम कर सकती है.

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