छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में सीपीएम 5 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

बेरोजगारी, किसानों की दुर्दशा, मजदूरों की समस्या चुनावी एजेंडा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य चुनाव में माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी 5 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। बता दें कि इससे पहले के चुनावों में सीपीएम दो से तीन सीटों पर ही चुनाव लड़ती थी लेकिन इस बार बढ़ोतरी करते हुए सीपीएम ने 5 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

सीपीएम के राज्य सचिव संजय पराते ने बताया कि वे इस बार भाजपा सरकार को सत्ता से हटाने के लिए पांच सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। संजय ने कहा कि वे इस बार बीजेपी मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए हर संभव प्रयास करेगी। अगर किसी भी पार्टी ने गठबंधन की पेशकश की तो बिल्कुल इस पर सहमति बनाई जाएगी।

पराते ने कहा कि 90 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ने की वजह है हमारा अधिक जनाधार नहीं होना, हम उन्ही सीटों पर चुनाव लड़ते है जहाँ हमारे वोट के प्रतिशत बढ़त में होते है। वहीं अपने कार्यकर्ताओं को लेकर कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं की संख्या को गिन पाना मुश्किल है।

वे अलग-अलग संगठनों के रूप में हम से जुड़े हुए है। जो चुनाव के वक्त साथ मिलकर काम करते है। वे चुनाव से पहले भी अपने-अपने क्षेत्र में जागरूकता के लिए काम करते रहते है।

ये होंगे चुनावी मुद्दे

संजय पराते ने अपने चुनावी एजेंडों को लेकर कहा कि सीपीएम की हमेशा से बेरोजगारी, किसानों की दुर्दशा, मजदूरों की समस्यों पर ही आधारित होती है। प्रदेश में भाजपा सरकार बीते 15 सालों से सत्ता में है, लेकिन आज भी रोजगार के नाम पर केवल युवाओं को छल्ला जा रह है।

किसानों की 15 सालों में इतने बड़े रूप में आत्महत्या सरकार की नाकामी को दर्शाता है। वहीं मजदूरों की चिंता भी इस सरकार को सिर्फ चुनाव के वक्त होती है। यह सरकार केवल व्यापारी और उद्योगपतियों का विकास कर रही है।

बस्तर सरगुजा में बड़े रूप में सरकार ने इन्हें लाभ पहुंचाया है, वहीं आदिवासियों का बड़े स्तर पर विस्थापन कर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह सरकार आदिवासी, किसान और मजदूर विरोधी है।

जनाधार नहीं होने की वजह

संजय ने आगे कहा कि राजनीति एक बिजनेस बन गया है, चुनाव के वक्त जनता का पैसा उन पर ही लुटा कर ये पार्टियाँ सत्ता में आती है, फिर चुनाव खर्च के पैसों को डबल करती है।

सीपीएम ऐसी व्यवस्था का विरोध करती है और यही वजह है कि सीपीएम को इतने बड़े रूप में जनाधार नहीं मिला पाता है। पर अब जनता जागरूक हो रही है। जल्द ही जनता इस व्यवस्था में चोट मारेगी।

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