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रघुवरदास ने जताई अपने पैतृक गांव के घर-कुएं को देखने की इच्छा

राजनांदगांव: झारखंड के मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में स्थित अपने पैतृक गांव के घर और कुएं को देखने की इच्छा जताई है। रघुवरदास ने कहा कि, उनका पैतृक मकान और कुआं उनके पिता चैतराम ने बनवाया था। आज भी इतने वर्षों बाद उनके मकान के सामने चैतरामदास, संत कबीरदास साहिब अंकित है। उसके पीछे उनके परिवार के अन्य सदस्यों के मकान थे, सभी मकान बेच दिए गए हैं। वे इसका प्रत्यक्ष देखने जल्द ही प्रदेश के दौरे पर आने वाले हैं। 

अधिकारियों ने किया निरीक्षण : 

बीते दिनों ग्राम बोइरडीह में प्रस्तावित कार्यक्रम की सुरक्षा संबंधी तैयारियों का निरीक्षण करने कलेक्टर भीम सिंह, एसपी प्रशांत अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ चंदन कुमार भी पहुंचे थे। वे रघुवरदास के घर भी पहुंचे तथा कुएं का निरीक्षण किया। रघुवरदास के स्वागत की तैयारी कर रहे गांव वालों में अभूतपूर्व उत्साह है। 

गांव के सार्वजनिक मैदान में होगा रघुवरदास का स्वागत : 

उन्होंने कहा कि, इस छोटे से गांव से निकलकर इतने बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बनना सौभाग्य की बात है। हमें मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि, मैं झारखंड के मुख्यमंत्री को अपने साथ लेकर आउंगा और हम बोइरडीह की पवित्र भूमि का चरणस्पर्श करेंगे। गांव वालों ने कहा कि, मुख्यमंत्री रघुवरदास का स्वागत वे गांव के सार्वजनिक मैदान में करेंगे, जिसे रानी की बगिया के रूप में जाना जाता है। 

ग्रामीणों ने कहा कि, रघुवरदास का परिवार काम के सिलसिले में झारखंड चला गया था और वे कभी-कभी गांव आते थे। 1979 में उन्होंने अपना पैतृक घर बेच दिया। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि, अपने पिता के साथ जब रघुवरदास आते थे, तब वे बहुत छोटे थे। धीरे-धीरे जब झारखंड में उनकी रोजीरोटी तय हो गई तो उनका आना कम हो गया।

पड़ोस की महिलाओं ने कहा कि, रघुवरदास का परिवार कबीरपंथी था, इसलिए उनके पिता ने जब अपना घर बनाया तो इसमें कबीर साहब का नाम भी लिखाया। गांव के लोगों ने कहा कि, रघुवरदास का गांव आना इस मायने में भी हमारे गांव के लिए अच्छा है कि, युवा पीढ़ी और बच्चे उन्हें देखकर प्रेरणा लेंगे कि, उनके गांव का लड़का जब पड़ोसी राज्य का मुख्यमंत्री बन सकता है तो वे अपने सपने सच क्यों नहीं कर सकते।

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