एस व्ही श्रीनाथ राव बने छत्तीसगढ़ के पहले इंटरनेशनल मास्टर

मनराखन ठाकुर

पिथौरा।

एक पिता ही जीवन का वास्तविक प्रेरणास्रोत होता है। जीवन के तंगहाली हालत में भी एक पिता ने अपनी ज़िद्द,जुनून और मेहनत से अपने पुत्र की एक इबारत लिख कर छत्तीसगढ़ के लिए एक मिसाल एवं उपलब्धि हासिल की है।

रायपुर के केपीएस स्कूल में अपने पुत्र को दाखिला करा कर पढ़ाई के साथ साथ शतरंज की बिसात में भी इतना माहिर व निपुण बना दिया कि आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनकर कर छत्तीसगढ़ के नाम को रोशन कर रहा है।

एस व्ही श्रीनाथ राव (चिन्ना) छत्तीसगढ़ अंचल के पहले खिलाड़ी हैं जिन्होंने इंटरनेशनल मास्टर बनने का गौरव प्राप्त किया है।

रायपुर नगर में पले बढ़े श्रीनाथ महज 5 वर्ष की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया। शतरंज की बेसिक जानकारी हेतु रायपुर के ही शतरंज खिलाड़ी आनंद से प्रशिक्षण प्राप्त कर शतरंज को अपने कैरियर के रूप में स्वीकार किया । 1 वर्ष की कड़ी मेहनत करके 6 वर्ष की अल्पायु में श्रीनाथ भारत के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय रेटेड प्राप्त खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया।

तब उनकी इलो रेटिंग 1800 थी । कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई करने की बात उन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण न करते हुए केवल शतरंज पर ही अपना ध्यान केंद्रित किया । बतौर खिलाड़ी के रूप में उनकी यह उपलब्धि कई मायनों में छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। श्रीनाथ ने बाहर रहते हुए शतरंज का अभ्यास किये जाने के संदर्भ में बताया कि उन दिनों छत्तीसगढ़ में इतना रेटिंग टूर्नामेंट का आयोजन नही होता था जितना कि वर्तमान समय मे हो रहा है।

श्रेष्ठ प्रदर्शन के उद्देश्य से रायपुर से महानगर की ओर रुख किया और अन्य वरिस्ठ खिलाड़ियों से मार्गदर्शन प्राप्त करने की कोशिश में लगे रहे। उस समय कई लोगों ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए सहयोग प्रदान करने की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने सहजता से धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अपने संसाधनों पर निर्भर रहना उचित समझा।

इन्होंने अपना एकमात्र लक्ष्य आई एम बनना रखा और उसी पर ध्यान केंद्रित कर सफलता की ओर अग्रसर हुए।इनके शुरआती प्रशिक्षक रहे आनंद अवधिया ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रीनाथ हंगरी में रहते है तथा ज्यादातर उन्हें बाहर रहते हुए शतरंज खेला।

हाल ही में उन्होंने आई एम के तीनों नार्म पूर्ण किये ।लाइव रेटिंग उनकी 2430 है।आनंद ने बताया कि वे शतरंज की बेसिक जानकारी ही दिए थे।टेक्निकल जानकारी उन्होंने रायपुर के वरिष्ठ शतरंज खिलाड़ी एवं कोच रविकुमार व रेलवे के विनोद शर्मा से ली थी। आई एम बनने के लिए उन्होंने स्पेशल कोचिंग ग्रैंड मास्टर्स अभिजीत कुंटे व आर बी रमेश से ली।

हंगरी में रहते हुए तैयारी के संदर्भ में श्रीनाथ ने बताया कि यहाँ पर रहते हुए आस-पास के देशों में जहाँ वीजा नही लगता शतरंज की स्पर्धा में हिस्सा ले सकते है।यहां पर क्लोज ग्रेंड मास्टर टूर्नामेंट होती है जहाँ केवल 12 से 13 शतरंज के दिग्गज खिलाड़ियों के मध्य राउंड रोबिन से मैच होता है। इस तरह की प्रतियोगिताएं प्रत्येक सप्ताह यहां पर आयोजित होती है जिस कारण से यहां पर आई एम, जी एम नार्म मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

यही कारण है कि भारत के ग्रेंड मास्टर आनंद ने भी स्पेन का चयन किया और वही रहकर इन्होंने विभिन्न टूर्नामेंट में भाग लेकर शोहरत एवं उपलब्धि प्राप्त की। बहरहाल श्रीनाथ द्वारा आई एम की उपलब्धि हासिल करने से छत्तीसगढ़ अंचल के नवोदित शतरंज खिलाडियों को प्रेरणा एवं मार्गदर्शन मिलेगा और शतरंज की गतिविधि निरंतर प्रगति की सोपानों कीओर अग्रसर होगी।

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