छत्तीसगढ़

एनिमिया को दूर भगाएगी छत्तीसगढ़ की कुटकी और रागी

रायपुर : लघु धान्य फसलों पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की 29वीं दो दिवसीय वार्षिक समूह बैठक का आयोजन 12 एवं 13 अप्रैल को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में कृषि महाविद्यालय रायपुर के सभागार में किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त सुनील कुमार कुजूर कल गुरूवार 12 अप्रैल को प्रातः 10 बजे बैठक का शुभारंभ करंेगे।

शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील करेंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के उप महानिदेशक (एफ एण्ड एफसी) डॉ. आई.एस. सोलंकी इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। बैठक में परियोजना के तहत देश भर में संचालित 16 मुख्य तथा 20 वैकल्पिक अनुसंधान केन्द्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

उल्लेखनीय है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, जगलपुर में लघु धान्य समन्वित अनुसंधान परियोजना का संचालन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा कोदो, कुटकी एवं रागी लघु धान्य फसलों की विपुल उत्पादन देने वाली 6 किस्में विकसित की गई हैं जिनमें इंदिरा कोदो-1 और छत्तीसगढ़ कोदो-2, छत्तीसगढ़ कुटकी-1 और छत्तीसगढ़ कुटकी-2 तथा इंदिरा रागी-1 और छत्तीसगढ़ रागी-2 शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ कुटकी-2 में लौह तत्व प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने के कारण यह एनिमिया की रोकथाम में सहायक है। छत्तीसगढ़ रागी-2 किस्म की खेती खरीफ के साथ-साथ ग्रीष्म काल में भी की जा सकती है। कोदो की दोनो किस्में म्यूटेशन ब्रीडिंग के द्वारा विकसित की गई हैं। नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लान्ट जेनेटिक रिसोर्सेज के सहयोग से यहां रागी की दो हजार से अधिक किस्मों के जननद्रव्य का संग्रहण एवं दस्तावेजीकरण किया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा लघु धान्य फसलों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन करते हुए कोदो राईस, कुटकी राईस, रागी माल्ट, मल्टीग्रेन आटा आदि उत्पादों का निर्माण एवं विक्रय किया जा रहा है। इन फसलों से नये उत्पाद तैयार करने हेतु अनुसंधान कार्य भी जारी हैं।

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