कोरोना से निपटने के लिए मुख्यमंत्री बघेल के पास न योजना, न इच्छाशक्ति : भाजपा

कोरोना रोकथाम के मोर्चे पर प्रदेश सरकार की विफलताएँ गिनाईं भाजपा चुनाव विधिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक गुप्ता ने

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के चुनाव विधिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक नरेशचंद्र गुप्ता ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में कोरोना पीड़ितों की बढ़ती संख्या के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जिम्मेदार हैं। गुप्ता ने कहा कि राज्य में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए मुख्यमंत्री बघेल के पास न तो कोई योजना है और न ही उनमें इच्छाशक्ति है। मुख्यमंत्री के पास कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए कोई योजना और रणनीति नहीं है, तो वे विपक्षी दलों की बैठक बुलाकर उनसे सलाह-मशविरा कर लें और राय ले लें। इसमें उनको किसी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। भाजपा उन्हें राज्य हित में सकारात्मक सहयोग करने में गुरेज नहीं करेगी।

भाजपा चुनाव विधिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक गुप्ता ने कहा कि कोविड -19 को लेकर राज्य के कांग्रेस नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई तरह के आरोप लगते हैं और रणनीति को गलत ठहराते हैं, जबकि वास्तविकता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कई बार फोन और ऑनलाइन बैठकों के जरिये चर्चा की और राय ली। मुख्यमंत्रियों की मांग पर ही लॉकडाउन और दूसरे अधिकार राज्यों को दिए गए। मुख्यमंत्री बघेल ने ही कोरोना से लड़ाई का अधिकार राज्यों को देने की मांग की थी।

मार्च महीने में ‘कोरोना से एक कदम दूर’ के नारे लगवाते मुख्यमंत्री को आज सांप सूंघ गया-गुप्ता 

जब अधिकार मिला तो प्रदेश सरकार फेल क्यों हो गए?  गुप्ता ने कहा कि कांग्रेसियों में अपने नेता की गलती का ठीकरा प्रधानमंत्री के सिर फोड़ना एक परंपरा-सी बन गई है। यह उचित नहीं है और प्रदेश की जनता के साथ बेईमानी है। मुख्यमंत्री अपनी राजनीति चमकाने के लिए नाच-गाना कराके और ढोल बजाकर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने में लगे हैं। गुप्ता ने कहा कि मार्च महीने में ‘कोरोना से एक कदम दूर’ के नारे लगवाते मुख्यमंत्री को आज सांप सूंघ गया है। वे किंकर्तव्यविमूढ़ जैसी स्थिति में हैं।

भाजपा चुनाव विधिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक गुप्ता ने कहा कि राज्य में आज कोरोना पीड़ितों की संख्या 45हजार से ऊपर पहुँच गई है और 380 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब पौने तीन करोड़ आबादी वाले राज्य में आने वाले दिनों में सक्रिय संक्रमितों की संख्या 60 हजार के पार पहुँच जाने की आशंका राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ही व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तैयारियां धरातल पर कहीं नहीं दिख रही है। कागजों पर ही कोविड सेंटर और बेड तैयार हो रहे हैं।

कोरोना पीड़ितों के लिए 22 हजार 606 बेड रिक्त होने की जानकारी दी

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कल हुई बैठक में कोरोना पीड़ितों के लिए 22 हजार 606 बेड रिक्त होने की जानकारी दी गई, फिर मरीजों को बेड क्यों नहीं मिल पा रहे हैं? गुप्ता ने कहा कि राज्य के कोविड सेंटर्स में अव्यवस्था का आलम है। न दवाइयां मिल रही हैं और न ही अच्छा खाना। कई कोविड सेंटर्स में मरीजों ने खाने की गुणवत्ता को लेकर विरोध और हंगामा कर रहे हैं। यदि बेड खाली है तो मरीजों को टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद हॉस्पिटल में भर्ती करने में 3 से 5 दिन क्यों लग रहे हैं? यह सरकार का एक और झूठ है।

भाजपा चुनाव विधिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल कोरोना संक्रमण को रोकने वाली बैठकों में स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव को अपने साथ क्यों नहीं बिठाते, यह विचारणीय प्रश्न है; जबकि कोरोना संक्रमण से निपटने और रणनीति बनाने की पहली जिम्मेदारी तो स्वास्थ्य विभाग की है। कल की बैठक में भी मुख्यमंत्री के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तो थे, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री अन्य मंत्रियों की तरह ऑनलाइन ही जुड़े।

मुख्यमंत्री ने कोविड -19 के मुद्दे पर पहली बैठक मार्च में

मुख्यमंत्री ने कोविड -19 के मुद्दे पर पहली बैठक मार्च में दिल्ली से लौटकर ही बुलाई थी। कल भी दिल्ली से लौटकर ही बैठक की। गुप्ता ने कटाक्ष कर पूछा कि क्या मुख्यमंत्री कोरोना से निपटने की रणनीति के लिए अपने ‘परिवार-दरबार’ में मत्था टेक कर पूछने जाते हैं? कोरोना महामारी वैश्विक आपदा है, ऐसे समय राजनीति नहीं, बल्कि जनहित और राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस महमारी काल में भी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगी है। अभी सरकार को पूरी ताकत और धन लोगों को कोरोना से बचाने में लगाने की ज़रूरत है।

भाजपा चुनाव विधिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस की सरकार कोरोना से निपटने में धन खर्च करने की जगह बिना बजट आवंटन के विधानसभा भवन बनवाकर श्रेय लेने में लगी है, जिलों में बिना जमीन आवंटन के कब्जे कर कांग्रेस भवन बनाने के अभियान में लोगों को झोंक रही है। पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाकर आम लोगों को कोरोना के नाम पर लूट से बचाएं।

गुप्ता ने कहा

गुप्ता ने कहा कि टेस्ट रिपोर्ट कितने दोनों में मिलेगी, यह आज तक तय नहीं है। टेस्टिंग, हॉस्पिटल में भर्ती, भोजन, पानी और दवाई में सरकार ने वीआईपी लोगों के लिए प्राथमिकता तय कर दी है आम जनता मर रही है। मुख्यमंत्री सहित सत्ता के बड़े लोग कोरोना प्रोटोकॉल की लगातार अनदेखी कर रहे हैं, शासन प्रशासन मौन है। इंद्रावती भवन में कोरोना फैल चुका है और सरकार तमाशा देख रही है। वहाँ पर सामाजिक दूरी और सेनेटाइजेजेशन की कोई व्यवस्था नहीं है और कार्यालय चल रहा है!

गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री, दोनों ने आजतक किसी भी कोरोना हॉस्पिटल का निरीक्षण नहीं किया है। होम आइसोलेशन वाले मरीजों के लिए डॉक्टर्स की जारी सूची में उनसे सहमति नहीं होना एक गंभीर अपराध है। ऐसे मरीजों के लिए ऑक्सीजन की क्या व्यवस्था है? इस कोरोना में स्वास्थ्य बीमा योजना का क्या योगदान है, जनता को स्पष्ट बताया जाए।

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