मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मीडिया को संबोधित करते हुए बीजेपी पर बोला हमला

राज्यपाल की कड़ी निंदा की

नई दिल्ली :

राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा बुधवार की रात विधानसभा भंग कर देने के बाद प्रदेश की सियासत गर्म हो गई है। इसको लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मीडिया को संबोधित करते हुए राज्यपाल की कड़ी निंदा की।

साथ ही उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि दुर्भाग्य है कि एक सीनियर बीजेपी नेता ने कहा कि हमें पाकिस्तान से निर्देश मिलते हैं। मैं राम माधव साहब और उनके सहयोगियों को चुनौती देता हूं कि इसका सबूत पेश करें।

उन्होंने कहा कि आपने हमारे साथियों के बलिदान का अपमान दिया है जिन्होंने देश के लिए पाकिस्तान के निर्देशों पर चलने से मना किया और मारे गए।

साथ ही उमर ने कहा कि हकीकत ये है कि बीजेपी ने जब पीडीपी से रिश्ता तोड़ा हमारी कोशिश रही कि विधानसभा भंग होकर फिर से चुनाव कराए जाएं। इसको लेकर गर्वनर पर हम लगातार जोर देते आए हैं।

लेकिन अनिश्चिचितता जम्मू-कश्मीर के फायदे की बात नहीं थी। खासकर सियासी पार्टियों के ऊपर ये लोग तलवार लटकाए हुए थे। उसके विधायकों के खरीद फरोख्त की चर्चा हो रही थी। उमर ने कहा कि हमने पीडीपी को सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया था हमें पता है इससे हमें राजनीतिक घाटा होता लेकिन प्रदेश के हित के लिए हमने यह फैसला लिया।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी ने प्रतिद्वंद्वी नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया था। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को लिखा था कि राज्य विधानसभा में पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी है जिसके 29 सदस्य हैं।

कांग्रेस और नेशनल कान्फ्रेंस ने भी राज्य में सरकार बनाने के लिए हमारी पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है। नेशनल कान्फ्रेंस के सदस्यों की संख्या 15 है और कांग्रेस के 12 विधायक हैं।

अत: हमारी सामूहिक संख्या 56 हो जाती है। उन्होंने कहा कि 87 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 44 विधायकों की जरूरत है। तीनों दलों के विधायकों की कुल संख्या 56 है जो इससे अधिक है।

उधर, विधानसभा भंग किए जाने की घोषणा से कुछ ही देर पहले पीपुल्स कान्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी बीजेपी के 25 विधायकों तथा 18 से अधिक अन्य विधायकों के समर्थन से जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने का दावा पेश किया था। लोन ने राज्यपाल को व्हाट्सऐप के जरिए एक संदेश भेज कर कहा था कि उनके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़ों से अधिक विधायकों का समर्थन है।

राजभवन द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में राज्यपाल ने विधानसभा भंग किए जाने की घोषणा कर दी। देर रात जारी एक बयान में राज्यपाल ने तत्काल प्रभाव से विधानसभा भंग करने की कार्रवाई के लिए 4 मुख्य कारणों का हवाला दिया जिनमें व्यापक खरीद फरोख्त की आशंका और विरोधी राजनीतिक विचारधाराओं वाली पार्टियों के साथ आने से स्थिर सरकार बनना असंभव जैसी बातें शामिल हैं।

बयान में कहा गया, ‘व्यापक खरीद फरोख्त होने और सरकार बनाने के लिए बेहद अलग राजनीतिक विचारधाराओं के विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए धन के लेन देन होने की आशंका की रिपोर्टें हैं। ऐसी गतिविधियां लोकतंत्र के लिए हानिकार हैं और राजनीतिक प्रक्रिया को दूषित करती हैं।’

गौर हो कि जम्मू कश्मीर में बीजेपी द्वारा समर्थन वापस लिए जाने के बाद पीडीपी-बीजेपी गठबंधन टूट गया था जिसके बाद 19 जून को राज्य में छह महीने के लिए राज्यपाल शासन लगा दिया गया था।

राज्य विधानसभा को भी निलंबित रखा गया था। अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव कराए जाने की अटकलों के बीच विधानसभा भंग होने से अब राज्य में नए चुनाव कराए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन 18 दिसंबर को समाप्त हो रहा था और इसके बाद राष्ट्रपति शासन लगना था। राज्य विधानसभा का कार्यकाल अक्टूबर 2020 तक था।

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