मुख्यमंत्री भाजपा का था, है और आगे भी रहेगा -श्वेता शालिनी

भाजपा का महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार बनाने में पेंच

मुंबई: मीरा भायंदर सीट से भाजपा का टिकट न मिलने पर निर्दल लड़कर जीतीं गीता जैन, बरसी सीट से राजेंद्र राउत, अमरावती जिले की बडनेरा सीट से जीतने वाले रवि राणा ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी है.

भाजपा का कहना है कि इन तीनों की तरह अन्य निर्दल विधायकों ने खुद भाजपा से संपर्क कर समर्थन देने की बात कही है, क्योंकि उनका नाता भाजपा से ही रहा है. नतीजे आने के दिन 24 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी 15 निर्दलीयों के संपर्क में होने की बात कही थी.

मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा का रुख साफ

शिवसेना के मुख्यमंत्री पद को लेकर अड़ जाने के सवाल पर भाजपा प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने कहा, “मुख्यमंत्री भाजपा का था, है और आगे भी रहेगा. मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा का रुख साफ है. शिवसेना भी इसे जानती है.”

दरअसल, राजग को बहुमत मिलने के बाद भी सरकार बनाने का पेंच तब फंस गया, जब 24 अक्टूबर को चुनाव नतीजे आने के दिन प्रेस कांफ्रेंस कर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने लोकसभा चुनाव के दौरान तय हुए 50-50 फॉर्मूले की बात उठा दी थी. उन्होंने संकेत दिए कि शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद चाहती है. सीएम कौन होगा? प्रेस कांफ्रेंस में इस सवाल पर उन्होंने कहा था, “यह बेहद अहम सवाल है.”

चुनाव से पूर्व शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपे उद्धव ठाकरे ने अपने इंटरव्यू में भी कहा था कि वह शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं. जिसके बाद से भाजपा-शिवसेना में सरकार बनाने को लेकर अबतक पेंच फंसा हुआ है. सोमवार को दोनों दलों के नेताओं ने राज्यपाल से अलग-अलग भेंट भी की. इससे माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री और सरकार में पदों को लेकर बातचीत सुलझ नहीं सकी है.

भाजपा प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने कहा, “लोकसभा चुनाव के दौरान जिस 50-50 फॉर्मूले की बात शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे कह रहे हैं, उसमें बहुत-सी बातें हो सकतीं हैं. चुनाव के दौरान 50-50 प्रतिशत सीटों पर लड़ने की बात भी तो हो सकती है. इसका मतलब ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने से नहीं लगाया जा सकता.”

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