जब विधानसभा में बोलते हुए भावुक हुए मुख्यमंत्री

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीत कालीन सत्र के अंतिम दिन अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान एक क्षण ऐसा आया जब मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह भावुक हो गए। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की ओर से चार दिवसीय शीतकालीन सत्र में सरकार के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। आसंदी की ओर से अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को स्वीकार किया गया था।

चर्चा के दौरान झीरम घटना का मामला उठा। इस दौरान बोलते हुए मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह भावुक हो गए। वहीं सदन में मौजूद कांग्रेस विधायक उमेश पटेल भी बोलते हुए भावुक हुए। विधायक उमेश पटेल के पिता नंदकुमार पटेल की मौत इस नक्सली हमले में हुइ थी। यह ऐसा क्षण रहा जब हंगामों से गूंज रहा विधानसभा का सदन शांत हो गया। 

मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा कि, उन्होंने झीरम मामले के तुरंत बाद तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से सीधे फोन पर बात की थी। उन्हें कहा था कि देश की सर्वोच्च जांच ऐजेंसी से इस घटना की जांच करा लीजिए। इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि भारत में आतंकवादी घटनाओं की जांच एनआईए करती है, तो इससे जांच कराने का फैसला लिया गया।

बोलते हुए मुख्यमंत्री भावुक हुए उन्होंने कहा कि पीडि़त परिवारों से मेरा राजनीतिक नहीं निजी संबंध था। मैंने इस प्रकार की राजनीति की कल्पना नहीं की थी। इतनी गंभीर चर्चा यदि सदन में होगी तो कोई ठहाके लगाएगा। पीड़ा होती है कोई राजनीति के लिए इस तरह से कर सकता है। मेरे लिए भावनात्मक लगाव जैसा मामला है।कभी ये सदन शहीदों के लिए मजाक ना उड़ाए। 

चर्चा में विधायक उमेश पटेल ने कहा कि, मैंने भावनाओं को दबाना सीख लिया है। जिसका दर्द मैैं दबाकर रखना चाहता हूं उसे बार -बार याद दिलाया जाता है। यदि इस मामले में मदद नहीं कर सकते तो कम से कम अपमान भी न करें।

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