कम सोने वाले बच्चों को Teenage में हो सकती है यह खतरनाक बीमारी

फिनलैंडः हेलसिंकी यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए शोध में खुलासा हुआ है कि भले ही कोई भी उम्र हो नींद की कमी के कारण शरीर पर बुरा असर पड़ता ही है। इससे पूरी दिनचर्या भी बुरी तरह प्रभावित होती है। इसके कारण गुड कॉलेस्ट्रॉल पर असर पड़ सकता है, जिससे शरीर की रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो सकती हैं। बचपन में नींद की कमी होने पर टीनएज में कोलेस्ट्रोल की समस्या हो सकती है।

हाल ही में हुई स्टडी के मुताबिक आपका बच्चा अभी कितनी नींद लेता है उससे आप समझ सकते हैं कि अपने टीनएज में उसे कोलेस्ट्रोल का सामना करना पड़ेगा। हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 1049 किशोरों के एक समूह के स्लीप पैटर्न की स्टडी की। जो बच्चे कुछ देर सोकर उठ जाते हैं और जिनका अनियमित स्लीप पैटर्न होता है, वे किशोरावस्था में पहुंचने के बाद हानिकारक लिपिड प्रोफाइल का सामना करना पड़ता है।पुअर लिपिड प्रोफाइल मतलब बेड कोलेस्ट्रोल हाई होना और गुड कोलेस्ट्रोल का कम होना।

ये परिणाम लड़कों के बजाए लड़कियों में सही निकले।नकारात्मक प्रभाव कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करता है। वैसे भी खराब नींद से आपके दिल और दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इससे मोटापा भी बढ़ता है। बच्चों के स्लीपिंग हैबिट्स, इंटेलीजेंस और लिपिड प्रोफाइल्स को 2006 से 2015 तक चार बार टैस्ट किया। नींद की गुणवत्ता और कितने घंटे सोए ये मापने के लिए एक टेक्निक एक्टिग्राफी यूज की गई।

इसमें प्रतिभागियों को कलाई में घड़ी जैसी एक डिवाइस बांधनी होती थी। इस तरह से डाटा इक्ट्ठा किया और फिर ब्लड सेम्पल्स लेकर कोलेस्ट्रोल की जांच की। इस शोध में साफ सामने आया कि बचपन में इनसोमनिया प्रभाव टीनएज में नजर आता है, वह भी हाई कोलेस्ट्रोल के रूप में। इसमें भी लड़कों की तुलना में लड़कियों को अनियमित स्लीप पैटर्न से हाई कोलेस्ट्रोल के चांसेस टीनएज में बढ़ जाते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक इससे पहले बच्चों के स्लीप पैटर्न को लेकर कभी कोई खास स्टडी नहीं हो पाई थी।

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