पैरेंटिंगलाइफ स्टाइल

उम्र के साथ बच्चो में होते है परिवर्तन, आपको लगे कुछ असहज तो करें ये

ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को एहसास होने लगता है कि शायद उनके बच्चे बड़े हो रहे हैं।

देखते ही देखते बच्चों का बचपन कब जवानी में बदल जाता है पता ही नहीं चलता। उम्र के इस पड़ाव में न सिर्फ उनके हार्मोंस में परिवर्तन होता है बल्कि उनकी सोच और भावनाएं भी बदल जाती है।

ऐसे में उनकी परवरिश की चिंता भी बढ़ जाती है, खासकर उस वक्त जब लड़की या लड़का कहें कि वह किसी से प्रेम करने लगे है। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को एहसास होने लगता है कि शायद उनके बच्चे बड़े हो रहे हैं।

डांट-फटकार नहीं, समझदारी से लें काम

अक्सर बच्चे के मुंह से ऐसी बात सुनकर आप गुस्‍सा हो और उनकी भावनाओं को समझने के बजाए उसे डांट-फटकार लगाएं। मगर आपका यह स्टेप गलत साबित हो सकता है।

इस स्थिति को काबू में लगाने के लिए समझदारी से काम लें न कि अपना आपा खोए। हम आपको ऐसे ही टिप्स बताएंगे जिन्हें फॉलो कर आप अपने बच्चे को समझ सकती है और उसे अच्छे से हैंडल कर सकते हैं।

समझने की कोशिश करें

अपना बच्चा आश्वस्त होकर आपसे बात कहता है इसका मतलब है कि वो आप पर भरोसा करते हैं लेकिन आपको समझने की कोशिश करनी होगी।

उसकी बात ध्यान से सुनें। उसके साथ ऐसा व्यवहार करें कि आप उसे समझने की कोशिश रहे हैं न कि उसे गलत ठहरा रहे हैं।

हरकतों पर दें ध्य़ान

उसका पहला प्यार एक क्रश या मोह हो सकता हैं। उम्र के इस पड़ाव में बच्चे को खुद इस बात का पता नहीं चलता, ऐसे में पेरेंट्स को उसके लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।

उस लड़के या लड़की के बारे में पूछने पर वह कैसा व्यवहार करता है। जब पेरेंट्स को यह पता चल जाता है कि उनका बच्चा प्यार की किस स्थिति में है तो इस स्थिति को संभालने में आसानी हो जाती है।

बेटी की मदद करें

अगर आपकी बेटी के ऐसी स्थिति में है तो उसकी भावनाओं को अनदेखा न करें क्योंकि आप समझदार है और जानती होंगी कि उसे बार-बार इस तरह का फिल होगा क्योंकि उम्र के इस पड़ाव में आकर कोई न कोई एक बार तो डगमगाता जरूर हैं।

ऐसे में उसे बताएं कि यह एक प्राकृतिक भावना है और उसे बताए कि वह भावनात्मक रुप से बड़ी हो रही है।

सीमाएं करें तैय

आजकल छोटी उम्र में भी बच्चे भटक जाते है क्योंकि प्यार की कोई उम्र नहीं होती है लेकिन अपने बच्चे को समझाएं कि किसी पर क्रश होना आम बात है

लेकिन उसकी उम्र के आधार पर यह नुकसानदायक हो भी सकता है। उसे बताएं कि प्यार की सीमाएं व हदें क्या हैं।

दिल टूटने पर कभी न छोड़े साथ

अधिकतर क्रश दिल तोड़ने वाले होते हैं। जब दिल टूटता है तो उस गम से उभरना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चे के टूटे हुए दिल और भावनाओं का ध्यान रखें।

उन्हें समझाएं कि क्रश प्यार नहीं होता है। यह तो कुछ समय तक महसूस होने वाली एक भावना है। भले ही उस वक्त आपका बच्चा इस बात पर अमल न करें लेकिन धीरे-धीरे व खुद समझ जाएगा।

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