राष्ट्रीय

बच्चे कर रहे है बीमार माता-पिता का भरण-पोषण

जिस दिन स्कूल की छुट्टी रहती है उस दिन गांव से मांगकर पेट भरना पड़ता है।

सोंईकलां। पढ़ने के लिए बच्चे स्कुल जाते है वहां मध्यान्ह भोजन करते हैं तथा अपने अपने बीमार माता-पिता का पेट भरने के लिए मध्यान्ह से रोटियां भी लाते हैं. यह मामला ददूनी ग्राम पंचायत के सोंईखुर्द की है जहां दो भाई प्राइमरी स्कुल में पड़ते हैं,

जो हर रोज मध्यान्ह भोजन के लिए स्कूल आते हैं और मध्यान्ह भोजन से दोनों भाई खुद के साथ-साथ अपने बीमार माता-पिता का पेट भरते हैं। जिस दिन स्कूल की छुट्टी रहती है उस दिन गांव से मांगकर पेट भरना पड़ता है।

दरअसल, सोंईखुर्द गांव निवासी 61 साल का जोगिंदर सिंह बीते 18 साल से पांव के घाव से जूझ रहा है। गैंगरीन जैसे घाव से उसका एक पांव गल सा गया है। पांव के घावों से पानी का रिसाव होता रहता है। इस कारण जोगिंदर सिंह मजदूरी भी नहीं कर पाता। पत्नी की मानसिक हालत अच्छी नहीं, ऐसे में परिवार को पेट भरने के भी लाले हैं।

जोगिंदर सिंह के दो बेटे 12 साल का जग्गा सिंह कक्षा 04 और 09 साल का सोनी कक्षा तीसरी में पढ़ता है। दोनों भाई रोज स्कूल जाते हैं। मध्यान्ह भोजन से खुद का पेट भरते हैं। उसके बाद माता-पिता व दो बहनों के लिए स्कूल से ही मध्यान्ह भोजन लेकर आते हैं। मध्यान्ह भोजन के लिए दोनों भाई बस्ते में बर्तन रखकर ले जाते हैं।

इन गरीब बच्चों की समस्या स्कूल प्रबंधन को पता है इसलिए, बचा हुआ मध्यान्ह भोजन दोनों भाइयों को दे दिया जाता है। जिस दिन भोजन कम पड़ता है। उस दिन हेडमास्टर पास ही आंगनबाड़ी से मध्यान्ह भोजन मंगाकर दोनों भाइयों को देते हैं। रविवार व अन्य छुट्टी के दिन जब स्कूल बंद होता है तब गांव वाले इस परिवार को भोजन दे जाते हैं या बच्चे गांव से मांग लाते हैं।

घर का मुखिया 18 साल से खटिया पर है। इसलिए माली हालत इतनी खराब है कि, बीपीएल राशनकार्ड से मिलने वाले 01 स्र्पए किलो के गेहूं व चावल तक को लेने के पैसे नहीं होते।

जोगिंदर की सबसे बड़ी बेटी 19 साल की बलविंदर कौर की शादी ग्रामीणों ने चंदा कर करवाई। गरीब परिवार को एक कमरे का घर बनाने के लिए भी ग्रामीणों ने चंदा किया। पिता की गरीबी देख दो बेटियों 7 साल की चिंटू कौर व 15 साल की सिफू ने पढ़ाई छोड़ दी और बीमार माता-पिता की देखभाल में लगी रहती हैं।

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