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डोकलाम विवाद के बाद चीन ने बढ़ाया ‘दोस्‍ती का हाथ’

नयी दिल्ली : डोकलाम विवाद के बाद चीन के राजदूत लूओ झाओहुई ने भारत के साथ पुराने विवाद को भूलते हुए दोस्‍ती की तरफ कदम बढ़ाने की बात कही है. पीपुल्‍स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की 68वीं वर्षगांठ पर बोलते चीनी राजदूत लूओ झाओहुई ने कहा ‘हमें पुराने विवादों को भूल कर नई दिशा की ओर कदम बढ़ाना चाहिए और जिससे दोनों देशों को फायदा होगा. चीन भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है. हमने द्विपक्षीय स्तर पर बहुत प्रगति की है. साथ ही साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों में भी खासी प्रगति की है’. उन्होंने कल कहा कि इस महीने की शुरुआत में श्यामेन में ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और दोनों नेताओं ने ‘मिलाप’ और ‘सहयोग’ का साफ संदेश दिया था.

उनकी यह टिप्पणी डोकलाम गतिरोध की पृष्ठभूमि में आई है. उन्‍होंने कहा कि चीन भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है. शुरू से ही भारत और चीन के बीच क्षेत्रीय विवाद होता रहा है, जिसमें डोकलाम विवाद पर दोनों सेनाओं के बीच दो महीने से ज्यादा वक्त तक गतिरोध बना था.

डोकलाम विवाद अभी तक का सबसे लंबा गतिरोध रहा. आपसी सहमति के बाद दोनों देशों के सैनिकों ने अपने-अपने कदम पीछे खींचे थे. डोकलाम विवाद के बाद चीन के राजदूत का यह बयान बहुत मायने रखता है.

क्या है डोकलाम विवाद : दरअसल, डोकलाम जिसे भूटान में डोलम कहते हैं, करीब 300 वर्ग किलोमीटर का ये इलाका चीन की चुंबी वैली से सटा हुआ है और सिक्किम के नाथुला दर्रे के करीब है… इसलिए इस इलाके को ट्राई जंक्शन के नाम भी जाना जाता है. ये डैगर यानी एक खंजर की तरह का भौगोलिक इलाका है, जो भारत के चिकन नेक यानी सिलिगुड़ी कॉरिडोर की तरफ जाता है. चीन की चुंबी वैली का यहां आखिरी शहर है याटूंग. चीन इसी याटूंग शहर से लेकर विवादित डोकलाम इलाके तक सड़क बनाना चाहता है. इसी सड़क का पहले भूटान ने विरोध जताया और फिर भारतीय सेना ने.

 

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