स्ट्रेचर पर ले जाए जा रहे चीनी सैनिक, भारत के पास है अनुभव

अभी तो सर्दियां शुरू भी नहीं हुई हैं और हालात और कठिन

नई दिल्ली: रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि चीन को अपने सैनिकों को ऊंचाई वाले पोस्ट्स से स्ट्रेचर पर अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। खास बात यह है कि अभी तो सर्दियां शुरू भी नहीं हुई हैं और हालात और कठिन होने वाले हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि फिंगर 4 पर तापमान माइनस 4 डिग्री तक गिर सकता है। अक्टूबर के बीच में झील की सतह पर पूरी तरह से जम चुकती है। लद्दाख के देपसांग और दौलत बेग ओल्डी इलाके में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री तक जा चुका है और अभी और कम होने की संभावना है।

चीनी कॉम्बैट स्वास्थ्यकर्मी ऊंचाई की जगहों से PLA के सैनिकों को हटा रहे हैं। उन्हें स्ट्रेचर पर लेकर जाया जा रहा है। इनकी जगह पर दूसरे सैनिकों को तैनात किया जा रहा है। हवा और बर्फ के कारण उन्हें बहुत परेशानी हो रही है। अब सर्दी बढ़ने के साथ हालात और ज्यादा कठिन हो जाएंगे।

अस्पतालों की संख्या बढ़ा रहा चीन

मिलिट्री सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि चीनी सैनिकों को फिंगर 4 एरिया से फील्ड अस्पताल ले जाया जा रहा है। इसकी वजह से अस्पताल भी बढ़ाए जा रहे हैं। भारत और चीन दोनों के सैनिक मौसम पर नजर रख रहे हैं।

भारत की सेना के पास पैंगॉन्ग सो से भी ऊंचे इलाकों में सैन्य ऑपरेशन करने का अनुभव है। भारतीय सेना दुनिया के सबसे ऊंचे जंगी मैदान पर सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात है। भारत ने भी इन हालात को देखते हुए मेडिकल तैयारी पूरी कर रखी है।

भारत के पास है अनुभव

वहीं, एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऊंचाई पर बैठी सेना के पास बचाव का ज्यादा मौका होता है। दुश्मन पर सामने से हमला करना तो घातक होता ही है, इतनी ऊंचाई पर चढ़ना भी मुश्किल होता है क्योंकि सांस लेने में दिक्कत होती है और सामान भारी होता है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट अखबार ने भारत के रिटायर्ड ब्रिगेडियर दीपक सिन्हा के हवाले से बताया है, ‘अगर आपको हमला करना हो तो आपको ऊंचाई पर बैठे एक इंसान का सामना करने के लिए 9 सैनिकों की जरूरत होती है।’

चीन ने की है तैयारी

चीन ने पिछले दिनों 4,600 मीटर की ऊंचाई पर कम कैलिबर की Howitzer के साथ अभ्यास किया था। इसे 6 की जगह 4 पहियों की गाड़ी पर रखा गया था। वहीं, ट्रक पर लदी HJ-10 में भी चार की जगह दो लॉन्चर थे।

माना जा रहा है कि इन हथियारों में बदलाव शायद पहाड़ी इलाकों में ले जाने के लिए वजन और लंबाई कम करने के मकसद से किए गए हैं। इन हथियारों को हवा के रास्ते भी ले जाया जा सकता है।

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