चिंता में चिंतामणि, सिंहदेव का किला भेदने बीजेपी को दमदार की तलाश

प्रदीप शर्मा

लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र

क्या लुण्ड्रा में टूटेगा उलटफेर

का मिथक या बदलेंगे चेहरे 

अंबिकापुर में भाजपा का सस्पेंस

कांग्रेस को टीएस पर भरोसा

चिंतामणि महाराज

टीएस सिंहदेव अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र में हमेशा से ही उलटफेर होता रहा है। कांग्रेस और भाजपा के विधायक बारी-बारी से यहां से चुनकर विधानसभा में पहुंचे रहे हैं। वहीं अविभाजित मध्यप्रदेश के जमाने से अंबिकापुर विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सुरक्षित थी। कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक मदन गोपाल सिंह लगातार जीत हासिल करते रहे हैं। 2003 के परिसीमन के बाद अंबिकापुर विधानसभा सीट को सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।

रायपुर: अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षित लुण्ड्रा विधानसभा की सीमा सामरी और जशपुर जिले से से जुड़ी हुई है यहीं वजह रही है कि इस विधानसभा क्षेत्र में जशपुर कुमार दिलीप सिंह जूदेव व वनवासी कल्याण आश्रम का सीधा प्रभाव रहा है। वहीं पदमश्री गहिरागुरु के अनुयायियों की बहुतायत भी चुनाव नतीजों को प्रभावित करती रही। जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिलता रहा।
साल 2003 के विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा ने विजय नाथ सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया। वहीं कांग्रेस की ओर से रामदेव राम मैदान में थे। भाजपा के विजयनाथ सिंह कांग्रेस के रामदेव राम को सीधे मुकाबले में मामूली अंतर से हराकर विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहे। भाजपा के विजय नाथ सिंह को 34357 व कांग्रेस के रामदेवराम को 34315 मत मिले।

2008 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बदलने के बाद भी भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के रामदेव राम को फिर चुनाव मैदान में उतारा। जिन्होंने सीधे मुकाबले में वर्तमान सरगुजा सांसद कमलभान सिंह को सीधे मुकाबले में 8195 मतों से हराया। कांग्रेस के रामदेव राम को 51636 व भाजपा के कमलभान सिंह को 43438 मतों से संतोष करना पड़ा।

2013 के चुनाव में कांग्रेस ने लुण्ड्रा विधानसभा में जीत हासिल करने के लिए अब तक भाजपा के साथ रहे गहिरागुरु के बेटे चिंतामणि महाराज को अपना उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस की रणनीति कामयाब रही। उलटफेर वाले नतीजों में कांग्रेस उम्मीदवार को जीत हासिल हुई। कांग्रेस के चिंतामणि महाराज ने सीधे मुकाबले में भाजपा के विजय बाबा को 9946 मतों से हराया। कांग्रेस के चिंतामणि महाराज को 64771 मत मिले वहीं भाजपा के विजय बाबा को 54825 मतों से संतोष करना पड़ा।
फिलहाल उलटफेर नतीजों वाली लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र में इस बार कांग्रेस और भाजपा का चेहरा कौन होगा, इस पर सस्पेंस बना हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार दोनों ही दल नए चेहरे पर दांव लगा सकते हैं।

कांग्रेस का गढ़ रहा है अंबिकापुर
2003 के परिसीमन से पहले अंबिकापुर विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थी। यहां के ज्यादातर चुनावी नतीजे कांग्रेस के पक्ष में ही रहे। कांग्रेस उम्मीदवार मदन गोपाल सिंह के नाम यहां से लगातार 4 बार जीत का का रिकार्ड कायम है। वहीं 2003 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पहली बार हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में भाजपा के कमलभान सिंह ने सीधे मुकाबले में कांग्रेस के मदन गोपाल सिंह हो 37222 मतों से हराया। भाजपा के कमलभान सिंह को 65812 मत मिले वहीं कांग्रेस मदन गोपाल सिंह को 28590 मतों से संतोष करना पड़ा।

साल 2008 में सामान्य वर्ग के आरक्षित अंबिकापुर विधानसभा सीट फिर कांग्रेस की झोली में आ गई। कांग्रेस की ओर सरगुजा जिले में कांग्रेस का चेहरा रहे सरगुजा राजपरिवार के टीएस सिंहदेव सीधे मुकाबले में भाजपा के अनुराग सिंहदेव को 948 मतों से हरा कर विधानसभा तक पहुंचने में कामयाब रहे। कांग्रेस के टीएस सिंहदेव को 56222 मिले वहीं भाजपा के अनुराग सिंहदेव को 55274 मतों से संतोष करना पड़ा।
2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने दोबारा इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा। कांग्रेस उम्मीदवार टीएस सिंहदेव ने एक बार फिर भाजपा के अनुराग सिंहदेव को सीधे मुकाबले में 19558 मतों से हराया। कांग्रेस के टीएस सिंहदेव को 84668 मत मिले वहीं भाजपा के अनुराग सिंहदेव को 65110 मतों से संतोष करना पड़ा।

इस बार कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ही मैदान में होंगे वहीं भाजपा का चेहरा कौन होगा इस पार्टी स्तर पर सस्पेंस बना हुआ। कयास लगाए जा रहे हैैं कि सरगुजा जिले की इस विधानसभा सीट पर जीत हासिल करने के लिए भाजपा को दमदार चेहरे की तलाश है वो चेहरा कौन होगा यह आने वाले दिनों में साफ हो पाएगा।

Tags
Back to top button