हैजे में जाम्बिया की मदद कर रहा विश्व स्वास्थ्य संगठन

हैजे में जाम्बिया की मदद कर रहा विश्व स्वास्थ्य संगठन

हैजा एक संक्रामक रोग है जो कि ‘विबियो कॉलेरी’ नामक बैक्टीरिया से फैलता है। इसका असर आंतों पर होता है। कभी यह बीमारी जानलेवा हुआ करती थी, लेकिन आज चिकित्सा विज्ञान की तरक्की की वजह से इस बीमारी को काबू कर लिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बुधवार को कहा कि वह जाम्बिया के दस लाख लोगों को हैजे से बचाने के लिए एक टीकाकरण अभियान में अफ्रीकी देश की मदद कर रहा है।

हैजे से बचाव के लिए जाम्बिया की राजधानी लुसाका में बुधवार को टीकाकरण अभियान शुरू किया गया। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में जाम्बिया को हैजा के टीके की बीस लाख डोज दी गई। जाम्बिया के स्वास्थ्य प्रशासन के अनुसार, इस अभियान से उन लोगों का टीकाकरण किया जाएगा, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

हैजा का उपचार न होने की स्थिति में कुछ ही घंटों में रोगी की मौत तक हो सकती है। अक्टूबर 2017 की शुरुआत में हैजे के प्रसार के बाद से देश में हैजे के कुल 2672 मामले सामने आए हैं। इनमें से अकेले लुसाका में ही 2,558 मामले सामने आए हैं। हैजे के कारण देश में हुई 63 मौतों में से 58 मामले लुसाका से थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन वर्तमान में हैजे के प्रसार के लिए जिम्मेदार कारणों की रोकथाम के लिए जाम्बिया राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य संस्थान के साथ मिलकर काम कर रहा है।

हैजा का उपचार : शरीर में पानी और नमक की मात्रा को तत्काल पूरा कर हैजा का सामान्य और सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है। मरीजों का उपचार मुंह से पुनर्द्रव घोल के जरिये किया जा सकता है। यह घोल चीनी और नमक से बनाया गया मिश्रण है, जिसमें पानी रहता है और इसे समुचित मात्रा में पिया जाता है। डायरिया या आंत्रशोथ के उपचार के लिए पूरी दुनिया में इसी मिश्रण का उपयोग किया जाता है। गंभीर बीमारी में नसों के जरिये यह घोल शरीर के अंदर पहुंचाया जाता है। समुचित तरीके और समय पर इस घोल का सेवन 99 फीसदी मरीजों को जान का कोई खतरा नहीं होता।

1
Back to top button