छत्तीसगढ़

प्रयोगात्मक पढ़ाई से शहर की शिक्षिका ने पायी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

बिलासपुर – खमतराई मिडिल स्कूल में पदस्थ शिक्षिका अनीता शर्मा ने नवाचारी शिक्षा को सरल बनाने अपने घर को ही पाठशाला बना दिया। लॉकडाउन के कारण बच्चों से सीधे नहीं मिल सकते थे इसलिए उनकी समझ में आए ऐसा तरीका शिक्षा का मैडम ने अपनाया और ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की।

विज्ञान प्रयोगात्मक विषय है लिहाजा उन्होंने इसे इसके मूल स्वरूप में घर पर मिलने वाली सामग्री के माध्यम से पढ़ाना शुरू किया। उनका यह अनोखा तरीका बच्चों को आकर्षित करने में सफल रहा।

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ज्यादातर निम्न और मध्यम आय वाले परिवार से होते हैं ऐसे ने स्कूल के हेडमास्टर देवनारायण कश्यप के मार्गदर्शन में खमतराई शाला के शिक्षकों ने कुछ स्मार्टफोन धारक बच्चों के साथ साधन विहीन दूसरे बच्चों को सावधानी बरतने की सलाह देकर जोड़ा, जिससे ज्यादा से ज्यादा स्कूली छात्र-छात्राएं ऑनलाइन पढ़ाई का हिस्सा बन पाए।

घर का एक कमरा तरह-तरह के पोस्टर और स्टडी मटेरियल से भर दिया। ऑनलाइन पढ़ाई में टीचर अनीता शर्मा का पूरा परिवार जुट गया। उनका यूनिक प्रयास देशभर में सराहा गया। थीम बेस्ड एजुकेशन अवार्ड के लिए देश के 26 टीचर का सलेक्शन किया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ से छह टीचर लिए गए इनमे से बिलासपुर जिले के खमतराई मिडिल स्कूल की अनिता शर्माक अकेली है।

यह सम्भव हुआ सभी के सहयोग से। खुद भी सीखने की ललक ने टीचर अनिता को बच्चों के साथ खेलना सिख दिया। वे खुद भी मानती है कि लॉकडाउन के दौरान अपने इस प्रयास से वह नौनिहालों को शिक्षा की ऊर्जा से भर सकी।

सभी 26 टीचर के इस यूनिक पढ़ाई के तरीके को ई कैश बुक के रूप में समाहित कर इसे कैश स्टडी का नाम दिया गया है। शिक्षिका अनीता शर्मा को मिली उपलब्धि से खमतराई मिडिल शाला का पूरा परिवार गौरवान्वित हुआ

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