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जस्टिस दीपक मिश्रा आखिरी बार सुप्रीम कोर्ट संभालते हुए भावुक हुए

नई दिल्ली: चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का आज सुप्रीम कोर्ट में आखिरी दिन था। आखिरी बार अदालत की कमान संभालते समय सीजेआई के साथ न्यायमूर्ति रंजन गोगोई भी थे, जो जस्टिस मिश्रा के बाद सुप्रीम कोर्ट की कमान संभालेंगे। बीते दस दिन में आधार, समलैंगिकता, विवाहेत्तर संबंध और सबरीमाला मंदिर में औरतों के प्रवेश जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण फैसले सुनाने वाली पीठों की अध्यक्षता करने वाले सीजेआई मिश्रा महज 25 मिनट तक चली अदालत की कार्रवाई के दौरान भावुक नजर आए। कार्रवाई के अंत में जब एक वकील ने ‘तुम जियो हजारों साल…’ गाना गाना शुरू कर दिया तो सीजेआई मिश्रा ने उन्हें अपनी अनोखी शैली में रोकते हुए कहा कि वर्तमान में मैं अपने दिल से बोल रहा हूं, अपने दिमाग से मैं शाम के वक्त बोलूंगा।

अंतिम दिन हुआ CJI को लेकर किए गए विवादित ट्वीट का जिक्र
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के साथ न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, जो तीन अक्टूबर को प्रधान न्यायाधीश पद ग्रहण करेंगे, और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर आज पीठ में शामिल थे। पीठ ने कहा कि सोमवार को तत्काल सुनवाई वाला कोई मामला नहीं लिया जाएगा और ऐसे मामलों की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष तीन अक्तूबर को हो सकेगी। तभी अचानक, अधिवक्ता आरपी लूथरा ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण के निवर्तमान सीजेआई के खिलाफ किए गए दो कथित विवादित ट्वीट का जिक्र किया। इनमें कोरेगांव-भीमा मामले समेत न्यायमूर्ति मिश्रा के हाल के फैसलों की आलोचना की गई थी। अधिवक्ता ने कहा कि अदालत कथित विवादित ट्ववीट्स का संज्ञान ले। लेकिन इस पर पीठ ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

न्यायमूर्ति मिश्रा को 17 जनवरी, 1996 को उड़ीसा उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद उनका मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में तबादला हो गया था। वह 19 दिसंबर, 1997 को स्थायी न्यायाधीश बने थे। उन्होंने 23 दिसंबर, 2009 को पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पदभार ग्रहण किया था। वह 24 मई, 2010 को दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने थे। न्यायमूर्ति मिश्रा 10 अक्टूबर, 2011 को पदोन्नत हो कर शीर्ष अदालत में पहुंचे थे और 28 अगस्त 2017 को देश के प्रधान न्यायाधीश बने थे।

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