बीमारियों से बचने के लिए साफ पेयजल, स्वच्छता और जागरूकता आवश्यक: भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री ने ‘स्वास्थ्य प्रथम’ विषय पर कार्यक्रम को सम्बोधित किया

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां विधानसभा परिसर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागृृह में स्वास्थ्य प्रथम विषय पर आयोजित स्वास्थ्य पर परामर्श कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य आज भी बड़ी चुनौती है। बीमारियों से बचने के लिए साफ पेयजल, स्वच्छता और जागरूकता जरूरी है। ऐसा करने से छोटी-मोटी बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा नेशनल फाउण्डेशन फॉर इंडिया के तत्वावधान में और मायाराम सुरजन फाउण्डेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष श्री धरमलाल कौशिक और स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे पास सबसे ज्यादा आवेदन इलाज के लिए आते हैं। यदि किसी को हृदय, कैंसर, और किडनी के रोग हो जाये, तो पूरा परिवार बरबादी के कगार पर आ जाता है। ऐसे में लोगो में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ मंे छत्तीसगढ़ी कहावत गुरू बनाएं जान के, पानी पिये छान के का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला खनिज विकास निधि की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर को उपर उठाने में किया जाना चाहिए। इस राशि का उपयोग निर्माण कार्यो की जगह शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी कार्याे पर, लोगों के लिए साफ पेयजल की व्यवस्था करने के लिए किया जाना चाहिए। विशेष रूप से सरगुजा और बस्तर के आदिवासी बहुल वनांचलों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है। जिला खनिज विकास निधि की राशि का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों को अच्छे वेतन देने में किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले गांवों में यदि तीन तालाब होते थे, तो एक तालाब का उपयोग नहाने के लिए, दूसरे तालाब का उपयोग मवेशियों के लिए और तीसरे तालाब का उपयोग पेयजल के लिए किया जाता है। यह व्यवस्था महाराष्ट्र के कुछ गांवों में अभी भी है। वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार हो रहा है, जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई है और पानी कचरा घुलने के कारण दूषित हो रहा है। कई क्षेत्रों में फ्लोराईड, आर्सेनिक और भारी धातु का प्रतिशत पानी में बढ़ने के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो रही हैं। साफ पेयजल की व्यवस्था और लोगों को साफ पानी के उपयोग के लिए जागरूक करने से इस समस्या का समाधान हो सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष श्री चरणदास महंत ने इस अवसर पर समाज सेवी श्री मायाराम सुरजन को याद करते हुए कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें श्री मायाराम सुरजन का आशीर्वाद मिला। उनकी चिन्ता हमेशा समाज कल्याण से जुड़ी रहती थी। मायाराम सुरजन फाउण्डेशन का यह अच्छा और उपयोगी आयोजन है। उन्होंने कहा कि पहला सुख निरोगी काया है। स्वस्थ रहने के लिए स्वस्थ मन जरूरी है। मन उदास हो तो बीमारी निकट आ जाती है। जरूरत सोच बदलने की है।

स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि आर्थिक, सामाजिक स्थिति, भौगोलिक परिस्थितियां और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धि, पेयजल और स्वच्छता जैसे विषय भी स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों को और भी सजगता से अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ पेयजल के उपयोग की आवश्यकता बतायी। कार्यक्रम में नेशनल फाउण्डेशन फॉर इंडिया की कार्यकारी निदेशक सुश्री यशोधरा दास गुप्ता, विशेषज्ञ डॉ. अभिजीत दास और डॉ. योगेश जैन ने भी अपने विचार प्रकट किए।

मायाराम सुरजन फाउण्डेशन के सरंक्षक श्री ललित सुरजन ने आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जन प्रतिनिधि, प्रशासन, पत्रकार सहित सब मिलकर स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने में किस तरह योगदान दे सकते हैं। इस अवसर पर अनेक मंत्रीगण और विधायक उपस्थित थे।

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