स्वच्छता मिशन के नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

-ग्राम पंचायत नेऊर शौचालय में हुआ फर्जीवाड़ा

हिमांशु सिंह ठाकुर

कवर्धा।

छत्तीसगढ़ में अभी हुए हाल ही में वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव के बाद सभी भाजपा की सरकार में फर्जीवाड़ा करने वाले चाहे वह अधिकारी हो या पंचायत स्तर के सरपंच या सचिव पिछले 15 वर्षो से भाजपा की सरकार रही पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार कर अपने कारनामों कों छिपाने का प्रयास करते रहे।

वहीं कवर्धा जिले के पंड़रिया विधानसभा के सूदुर वंनाचल क्षेत्र के ग्र्राम पंचायत नेऊर में शौचालय निर्माण कार्य में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है बताया जा रहा है कि पंड़रिया ब्लाॅक के बहुचर्चित ग्राम पंचायत नेऊर का मामला सामने सूचना के अधिकार में प्राप्त हुए है, जहां शौचालय निर्माण कार्य में 230 हितग्राहियों कों शौचालय निर्माण कार्य का लाभ मिलना था, लेकिन यहांके सरपंच द्वारा गरीबों के रूपयों में स्वयं डाका डाला है एवं खुद ही अपने ही घर में स्वयं पंचायत की राशि से शौचालय निर्माण कार्य कराया गया है।

ग्राम पंचायत के सरंपच ने शासकीय रूपयों का दुर्पपयोग करते हुए पिछले भाजपा के सरकार में जमकर फर्जीवाड़ा किया है,इसका खुलासा तब हुआ जब इसकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत पंचायत से जवाब मांगा गया ।जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि नेऊर सरपंच पति बहादुर सोनी पिता जगदीश सोनी जो कि ग्राम पंचायत नेऊर के शौचालय सूची में स्पष्ट रूप से अंकित किया गया है।

जिसमें परिवार का आईडी क्रमांक -121334765 यह एपीएल कार्ड पहचान पत्र क्रमांक -02-004-004001/343 उपवर्ग एसटी स्वीकृत राशि जिसमें 12000/- रूपयें साफ तौर पर दर्शाया गया है।वहीं ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पंचायत सचिव के साथ सरपंच ने भाजपा की सरकार में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है एंव करोड़ों रूपयों की राशि का भी घोटाला किया गया है।

गांव के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार यह बात भी सामने आयी है कि पंचायत की सरंपच भाजपा कार्यकर्ता है एंव सरपंच ने शौचालय निर्माण कार्य की सामाग्राी के लिए गांव का ही लोकल रेत एंव हाथ से बनाया गया ईट का उपयोग किया गया है।

जनपद पंचायत पंड़रिया से आवेदक के द्वारा सूचना के अधिकार उपयोगिता प्रमाण प्रत्र की जानकारी चाही गई थी,परंतु वर्षो बित जाने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्राम पंचायत नेऊर के हाॅट बाजार में आज पर्यन्त तक किसी प्रकार की पुरूषो -महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब तक बाथरूम मुहैया भी नहीं कराई जा सकी है। वहीं बाथरूम कन्या आश्रम के दिवाल को बना दिया गया है।

जहां पंचायत में गरीब आदिवासीयों के लिए 68 लोगों के लिए शौचालय निर्माण आज तक नहीं कराया जा सका है पंचायत में पिछले कार्यकाल में भाजपा के सरकार में जमकर भ्रष्टाचार किया गया जिसकी जांच आज तक जिलें के न ही अधिकारी करा सके और न ही नगरीय प्रशासन कर सकी,आवेदन दिये जाने के बाद भी आवेदन केा कचरे की टोकरी में फेंक दिया गया।

अगर ग्राम पंचायत नेऊर में सरपंच के कार्यकाल में कराये गये निर्माण कार्यो की जांच होती है तो निश्चित तौर पर विश्वास दिलाया जा सकता है कि लगभग करोड़ों रूपयोें का फर्जीवाड़ा सामने निकलकर आ जाएगा। ग्राम पंचायत ने शौचालय निर्माण कार्य मेें अनेकों भ्रष्टाचार कर पंचायत को ओ डि एफ घोषित कर दिया गया है जो कि ग्राम पंचायत ओ डि एफ के तर्क पर ही नहीं था जिसे तत्काल अपने वाहा वाही लूटने की वजह से ही पंचायत को ओडीएफ घोषित करा दिया गया।

वहीं सरपंच एंव सचिव के भ्रष्टाचार के कारण ही आज देखने पर पता चल जाएगा कि शौचालय का छत व दीवाल ,सीट भी गायब हो चुका है। ग्र्रामीणों मंशाराम ,भोलाराम , कलीराम ,प्रेमलाल सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि शौचालय निर्माण कार्य में इनके द्वारा जमकर भ्रष्टाचारी किया गया है।

ग्रामीणों से चर्चा कर बताया कि सरपंच को पद से हटाया जाये क्योंकि इनके पति के द्वारा शासन को अंधेरे में रखकर शौचालय निर्माण कार्य कराया गया है। वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत गांव व शहर को खुले में शौच मुक्त करने की घोषणा 2 अक्टूबर 2014 को की थी. पंरतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना गांव -गांव शहर- शहर में शौचालय बनानें का सपना भी पूरी तरह से चकनाचूर होते नजर आ रहा है।

इस अभियान की शुरूवात तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डाॅ रमन सिंह ने भी प्रधानमंत्री के इस बेहतर अभियान को पूर्ण करने के लिए कमर कस लिया था। और अपने अधिकारीयों को जल्द ही सभी गांव व शहर को ओडीएफ घोषित करने के निर्देश भी जारी कर दिये गये थे।

जिसमे जिले के अधिकारीयों को मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद आनन-फानन में सभी गांव व शहर को ओडीएफ घोषित करना पड़ा. परंतु जिले के अधिका​रियों ने एक भी बार ये नही सोचा कि गांव व शहर को ही प्रमुख रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुले में शौच मुक्त करने की जो बीड़ा उठाई थी. उसमें जिलें के सभी अधिकारीयों ने प्रधानमंत्री का सपना चकनाचूर कर दिया।

ग्राम पंचायत के संरपंचो ने जब यह देखा कि शौचालय निर्माण की राशि हितग्राहियों को देने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है तभी इस स्थिति में मनरेगा का सहारा लिया गया.तभी ऊपर बैठे प्रशासनिक अधिकारीयों का एकमात्र लक्ष्य बन गया कि किसी भी तरह से जल्द से जल्द पहले पंचायत फिर जनपद एवं जिला पंचायत को ओड़ीएफ घोषित करने का लक्ष्य रह गया तब एैसे में समय में भ्रष्टाचारियों ने केंन्द्र सरकार के दो सबसे अहम अभियान स्वच्छ भारत मिशन और मनरेगा कों अपने भ्रष्टाचार करने का साधन बना लिया।

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पंड़रिया विकासखंड़ के ग्राम पंचायत नेऊर में बने शौचालय का सारा कच्चा चिट्ठा सूचना के अधिकार के तहत् पूरा मामला उजागर हो गया. खास बात तो ये है कि जिला पंचायत के अधिकारी को भी इसकी संमपूर्ण बात की जानकारी है ।

जिला पंचायत के अधिकारी ये बात कों जानते हुए भी आज तक पंचायत मे जांच तो दूर देखने व झांकने भी नही गए। आज तक अधिकारयों को इस बात की भनक भी नही लगी कि ग्राम पंचायत नेऊर में 68 हितग्राहियों को शौचालय निर्माण का लाभ नही मिला है. पंचायत के हितग्राहि आज भी खुले मे शौच करने मजबूर हैं। ग्राम पंचायत नेऊर के सरपंच के घर मे खुद ही पंचायत के राशि से बनाया गया है।

आवेदक को जब इस बात की जानकारी मिली तब ग्राम पंचायत नेऊर सरपंच के घर मे खुद ही पंचायत के राशि से निकालकर शौचालय बनाया गया हैं. तो आवेदक ने पंचायत मे सूचना के अधिकार के तहत् जानकारी निकलवाई तो बात का स्पष्ट खुलासा हुआ कि सरंपच ने स्वंय घर में शौचालय का निर्माण पंचायत के राशि से कराया है।

आवेदक के पास पंचायत के द्वारा दिये गये जवाब में संरपचं का नाम स्वयं अंकित देखा जा सकता है एंव यह स्पष्ट दर्शाया गया है कि ग्राम पंचायत के संरपंच पति बहादुर सोनी, पिता जगदीश सोनी, ग्राम पंचायत नेऊर के शौचालय सूची में नाम स्पष्ट अंकित है. जो कि शौचालय निर्माण कार्य के सूची के सरल क्रमांक 06 में भी स्पष्ट रूप से अंकित है।उक्त कालम में पंचायत सरपंच को भुगतान किया जाना स्पष्ट दर्शाया गया है व आवेदक के द्वारा पुनः शौचालय संबंधित सूचना के अधिकार में उपयोगिता प्रमाण -पत्र की जानकारी चाही गई तो ग्राम पचांयत के सरंपच ने सचिव से मिलीभगत कर अपना नाम ही सूची से हटा दिया और आवेदक कों जानकारी भी सही ढ़ंग से व पूर्ण नही दि गई।

इस आशय से यह स्पष्ट है. कि कही न कही ग्राम पंचायत नेऊर में फर्जीवाड़ा पिछले सरकार में समय के रहते किया गया है। इसी कारण आवेदक कों दीये गयें जानकारी के बाद से सर्वे सूची से साफ तौर पर अंकित नाम जो दर्ज कीया गया था। उसे हटा दिया गया. शौचालय की जो तस्वीर दी गई हैं।

उसी शौचालय कों मनरेगा के अंतर्गत बना कर हाल ही में उसका मुल्यांकन और सत्यापन कर भुगतान भी हो चुका है। इसी दौरान आवेदक ने इस मामले की स्थिति के विषय जिला प्रतिनिधि को इसकी जानकारी दी जिसके बाद प्रतिनिधि नें पंचायत में जाकर ग्रामीणों से मुलाकात कर शौचालय में हुए फर्जीवाड़ा के संबंघ में जानकारी प्राप्त की.

जिसमें ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में लगभग 68 हितग्राहियों को शौचालय का लाभ नही मिला है। आज भी कुछ लोग खुले में शौच करने मजबुर है.आवेदक ने ग्राम पंचायत नेऊर में फर्जीवाड़ा का खुलासा करने के बाद सूचना के अधिकार के तहत् मिली जानकारी के बाद तत्काल इस मामले में पहले जानकारी पंड़रिया जनपद पंचायत के सीईओं को दी।

परंतु जानकारी देने के बाद भी कोई प्रशासनिक कार्यवाही अधिकारी के द्वारा नहीं कि गई. उसके बाद आवेदक ने पंचायत सरपंच एंव सचिव पर दंड़ात्मक कार्यवही नही होने के बाद शिकायत पंड़रिया अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को दी ,आवेदक कों अधिकारी के द्वारा आश्वासन दिया गया कि कार्यवाही की जाएगी।

जिसकें कुछ दिनों के बाद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने जांच का जिम्मा पंड़रिया जनपद पंचायत सीईओं को सौंप दिया. फिर जनपद पंचायत के अधिकारी के द्वारा जांच टिम गंठित कर जाॅच के लिए चंद्रशेखर एंव शंकर श्याम को जाॅच टीम नियुक्त किया था।

जिसमें जांच अधिकारी के द्वारा ग्राम पचांयत सरंपच के पक्ष में रिपोर्ट तैयार किया गया. जिसके बाद पुनः आवेदक के द्वारा पंड़रिया जनपद पंचायत से जाॅच रिपोर्ट की काॅपी सूचना के अधिकार में प्राप्त कि गई। पंरतु जांच अधिकारी ने पंचायत सरपंच के पक्ष में अपना फैसला लिखा जिससे आवेदक के द्वारा संतुष्ट न होने कि स्थिति में आवेदक ने जिला दंड़ाधिकारी कलेक्टर कबीरधाम को शिकायत सौंपा।

पंरतु जिला कलेक्टर के द्वारा भी कोई कार्यवाही नहीं कि गई ,इस स्थिति में जांच के लिए वर्षो बीत जाने के बाद भी अब तक कोई कार्यवाही पंचायत के संरपच पर नही होने के कारण आवेदक ने इसकी शिकायत ड़ाक-पोस्ट के माध्यम से आयुक्त दुर्ग, कमीश्नर दुर्ग, मुख्यसचिव छ़.ग शासन , पंचायत सचिव एंव मुख्यमंत्री छ.ग शासन को शिकायत करने के बावजूद भी अब तक कोई प्रशासनिक कार्यवाही आवेदक के दिए गयें शिकायत पर नहीं कि गई.

इससे साफ स्पष्ट है कि प्रदेश भर में भाजपा की सरकार में ग्राम पंचायत नेऊर में शौचालय निर्माण कार्य में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है अगर पंचायत की जांच होती है तो पंचायत सरंपच पर करोड़ों रूपयों का भ्रष्टाचार करने का मामला सामने आ सकता है।

अभी हम सब इलेक्शन में व्यस्त थे, देखता हूं फिर बता पाऊॅगा। आवेदन को देखने के बाद ही कार्यवाही होगी।
अवनीश कुमार शरण कलेक्टर, कवर्धा

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