छत्तीसगढ़

आज बिलासपुर में छठ पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम भूपेश बघेल

बिलासपुर:आज छठ पुजा है। छठ पर्व, छठ या षष्‍ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है।

इसी कड़ी में आज बिलासपुर में अरपा नदी पर स्थित छठघाट में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत छठ पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए। सीएम बघेल ने अरपा मैया की आरती भी उतारी।

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि छठ पूजा के पूर्व जीवनदायिनी अरपा नदी की पूजा व आरती करने की परंपरा है। इसके पीछे यह पवित्र भावना है कि नदी को प्रदूषण मुक्त रखें और इसमें सतत् जल का प्रवाह होता रहे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छठ पूजा केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी जरूरी है। उनके लिये भी जरूरी है जो अपने जड़ों से कट रहे हैं। उन बेटों के लिये जरूरी है जो इस पर्व के बहाने घर आते हैं।

उन माताओं के लिये जरूरी है जो इस पर्व के बहाने अपने संतानों को देख लेती हैं। उन परिवारों के लिये भी जरूरी है जिनके सदस्य रोजी-रोटी के लिये देश और दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में रहते हैं और छठपर्व मनाने के लिये एकत्रित होते हैं।

उन नयी पीढ़ी के लिये भी जरूरी है जो नदियों को केवल किताबों में देखते हैं। इस पूजा में उगते सूरज को ही नहीं, बल्कि डूबते सूरज को भी नमन किया जाता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में छठ पर्व पर पहली बार अवकाश दिया गया है।

नदी को प्रदूषण मुक्त रखें : धरमलाल कौशिक

कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष एवं बिल्हा क्षेत्र के विधायक धरमलाल कौशिक ने कहा कि छठ पूजा के पूर्व जीवनदायिनी अरपा नदी की पूजा व आरती करने की परंपरा है। इसके पीछे यह पवित्र भावना है कि नदी को प्रदूषण मुक्त रखें और इसमें सतत् जल का प्रवाह होता रहे। उन्होंने बताया कि अरपा नदी से बिल्हा में पांच हजार एकड़ क्षेत्र में सिंचाई होती है। इस नदी पर अरपा-भैंसाझार परियोजना के पूर्ण होने से 67 हजार एकड़ में सिंचाई होगी।

कार्यक्रम में बिलासपुर विधायक शैलेष पाण्डेय, तखतपुर विधायक रश्मि सिंह, बेलतरा विधायक रजनीश सिंह, कलेक्टर डॉ. संजय अलंग, पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल, छठपर्व आयोजन समिति के सदस्य तथा महिलाएं, पुरूष, बच्चे, बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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