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भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए सीएम को : भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उस कथन पर कड़ा एतराज जताया है जिसमें मुख्यमंत्री ने धान खरीदी मुद्दे को लेकर भाजपा पर अफवाह फैलाने की बात कही है और भाजपा नेताओं को दलाल बताया है।
उसेंडी ने कहा कि भाजपा का इस मुद्दे पर शुरू से किसानों के पक्ष में स्पष्ट दृष्टिकोण था और पार्टी ने जिन बिन्दुओं पर जोर दिया, सरकार अब वह मानने की बात कर रही है तो यह भाजपा के दृष्टिकोण की प्रामाणिकता का परिचायक है, अफवाह नहीं। रही बात दलालों की, तो प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ऐसा कहकर प्रदेश के लाखों परेशान किसानों को दलाल बताने की धृष्टता की है और अपनी इस बात के लिए मुख्यमंत्री को प्रदेश के किसानों से निःशर्त माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष उसेंडी ने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से किसानों को धान खरीदी के लिए केवल तीन बार टोकन दिए जाने के आदेश के खिलाफ थी और पार्टी की मांग थी कि पहले की तरह पांच बार टोकन दिए जाने की बात के पत्र में थी। अब मुख्यमंत्री ने स्वयं किसानों को पांच बार टोकन देने की बात कही है। भाजपा के इस बिन्दु को स्वीकार कर मुख्यमंत्री फिर भी हम पर अफवाह फैलाने का आरोप लगा रहे हैं,
यह हैरानी की बात है। इसी तरह विपक्ष में रहते हुए तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष के नाते स्वयं भूपेश बघेल ट्वीट करके और चिट्ठी लिखकर एक नवंबर से धान खरीदी का दबाव बनाते थे, पर अब मुख्यमंत्री बनने के बाद बघेल ने धान खरीदी एक माह टालकर एक दिसंबर से क्यों शुरू की? और अब क्यों 15 फरवरी के बाद भी धान खरीदी जारी रखने की घोषणा करने पर विवश हुए हैं?
भाजपा इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ थी तो यह अफवाह कैसे हो गई? धान खरीदी की लिमिट तय करना सरकार का अपना फैसला था और भाजपा चाहती थी कि किसानों की उपज का एक-एक दाना सरकार बिना किसी हीलाहवाले के खरीदे। अब प्रदेश के मुख्य सचिव ने धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने की घोषणा की है तो क्या भाजपा का किसानों का साथ देना मुख्यमंत्री को अफवाह फैलाना लगता है?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष उसेंडी ने कहा कि धान खरीदी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री का यह कहना भी शर्मनाक है कि इस मुद्दे पर दलालों को तकलीफ हो रही है। उसेंडी ने सवाल किया कि क्या प्रदेश के लाखों परेशान किसानों को मुख्यमंत्री बघेल दलाल मानते हैं? प्रदेश के किसान धान खरीदी को लेकर पहली बार अब तक की सर्वाधिक तकलीफ झेल रहे हैं, धान खरीदी का बहिष्कार कर समितियों पर ताला जड़ रहे हैं और अफसरों को बंधक तक बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री साफ करें कि क्या वे धान बेचने वाले सभी किसानों को दलाल बता रहे हैं? दरअसल मुख्यमंत्री बघेल समेत समूची कांग्रेस को हर मामले में दलाली और कमीशन सूंघने की आदत हो गई है और इसलिए परेशान किसानों में भी मुख्यमंत्री को दलाल नजर आ रहे हैं। यह प्रदेश के किसानों का खुला अपमान है। मुख्यमंत्री बघेल को किसानों को दलाल बताने की धृष्टता पर माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष उसेंडी ने कहा कि भाजपा कांग्रेस की तरह अफवाहों और दलाली की राजनीति नहीं करती। अपने स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ प्रामाणिक चिंतन की राजनीति करती है। भ्रम फैलाना, झूठ-अफवाह की राजनीति और दलाली कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र है। भाजपा ने जिन बिन्दुओं पर जोर दिया, प्रदेश सरकार कम से कम उन्हें मानने की बात करती नजर आ रही है, यह भाजपा की राजनीतिक प्रामाणिकता है।
कांग्रेस के विधायकों और किसान कांग्रेस के नेताओं तक ने मुख्यमंत्री से मिलकर धान खरीदी प्रक्रिया को लेकर असंतोष जताया है तो फिर भाजपा पर अफवाह फैलाने और भाजपा नेताओं को दलाल बताना यह जरूरत रेखांकित करता है कि मुख्यमंत्री को अपनी बदहवासी और मानसिक असंतुलन का ठीक-ठीक इलाज कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीएम को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए।
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