पंचायतों की जगह सीएमडीसी को रेत खदानों के संचालन का अधिकार, तानाशाही निर्णय

भूपेश बघेल ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के अधिकारों पर किया कुठाराघात

बालोद: विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राज्य में रेत खदानों के संचालन का जिम्मा ग्राम पंचायतों से छीनकर सीएमडीसी को सौपे जाने के निर्णय को जिला योजना समिति के सदस्य और पार्षद नितेश वर्मा ने तानशाही बताते हुवे तीखी आलोचना की है।

विधानसभा कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि, वर्तमान पंचायती राज व्यवस्था के तहत रेत खनन, खदानों के संचालन का अधिकार जो मिला है उसे हम वापस लेना चाहते है।

सदस्य और पार्षद नितेश वर्मा ने रेत खदानों के संचालन का अधिकार पंचायतों से छीनकर सीएमडीसी को दिए जाने के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्णय को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के अधिकारों पर कुठाराघात बताया है।

पंचायतों को प्रभावशाली रूप में काम करने तथा अपने दायित्वों एवं कर्तव्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन और अधिकारों की जरूरत होती है ऐसे में उनके अधिकारों को छीनकर राज्य की कांग्रेस सरकार पंचायती राज को प्रभावहीन करना चाहती है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्णय की आलोचना करते हुवे सदस्य और पार्षद ने कहा कि, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का सपना था की ग्राम स्तर पर लोगों के कल्याण के लिए ग्राम पंचायतों ज्यादा से ज्यादा अधिकार मिले लेकिन 15 वर्षो बाद प्रदेश की सत्ता में लौटी कांग्रेस महज 2 माह और 3 दिन के कार्यकाल में ही अधिकारों को छीनकर पंचायतों के अस्तित्व को खतरे में डालने का कारनामा करना चाहती है।

सदस्य और पार्षद नितेश वर्मा ने कहा कि, एक ही परिवार पर निर्भर रहने वाली कांग्रेस चाहती है की प्रदेश की ग्राम पंचायतें भी उनकी सरकारों पर निर्भर हो। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पंचायती राज व्यवस्था ग्राम स्वराज के सपने को चकनाचूर कर प्रदेश की कांग्रेस सरकार गांव की जनता के साथ माइंड गेम खेल रही है।

पंचायतो के कारण ही लोकतंत्र मजबूत है, प्राचीन काल से ही देश की एकता और अखंडता के लिए पंचायतों ने रक्षा कवच का काम किया है लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को प्रदेश की अपनी सरकार के अलावा और कुछ दिखाई नही देता गांव-गांव में जो तीसरी सरकार है उनके अधिकारों को छीनकर गांव की सरकार के रास्ते में अड़चनें पैदा करना चाहते है।

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