छत्तीसगढ़

क्लिपर28 की खबर का असर : CMHO ने दिया आश्वस्त, आवेदन में जगी न्याय की उम्मीद

जिला चिकित्सा अधिकारी आर एस सिंह आवेदक सत्या देवी वर्मा को आस्वस्त करते हुए भरोसा दिलाया था

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

संवाददाता: शिव कुमार चौरासिया

ज्ञात हो कि बीते कुछ दिन पहले एक मामला जिला सूरजपुर के विकासखंड प्रतापपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेवटी का जिसको की क्लिपर 28 की टीम ने ततपरता से प्रकाशित किया था जिसमे की वहां के जिला चिकित्सा अधिकारी आर एस सिंह आवेदक सत्या देवी वर्मा को आस्वस्त करते हुए भरोसा दिलाया था कि आपको मौका मिलना चाहिए किउंकि आप विगत 3 वर्षों से आया व दाई का काम कर रही हैं को लगातार स्वास्थ्य अधिकरियों द्वारा काम से निकलने की धमकी दी जा रही है और उसकी जगह किसी और को नियुक्त करने की बात कही जा रही है लेकिन उसी हॉस्पिटल में एक नए स्वीपर की नियुक्ति वहाँ के डॉ अमित कुमार पटेल के एक रिश्तेदार की नियुक्ति कर दी गई है जिसका तनख्वाह 7500 रुपये है ओर सत्या देवी वर्मा आज मानसिक रूप से परेशान हैं।

आज ऐसा पहली बार देखने को मिला है जिनमे नीचे स्तर के अधिकारी नियम कानून को ताक मे रखकर जे डी एस से किसी की नियुक्ति कर देते हैं और महज एक कंप्यूटर ऑपरेटर जो कि पिछले cmho के द्वारा नियुक्त कर दिया गया जो फर्जी तरीके से कुछ मितानिनों को अपने साथ मिलकर bmo से शिकायत कर देती है और bmo के द्वारा जांच की बात की जाती है।

7500 प्रति महीने में नियिक्त

बतादे की कांग्रेस की सरकार ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि जितने भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत आया व दाई का काम करने वाले कर्मचारी है उनके वेतन में वृद्धि की जाएगी और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी लेकिन सूरजपुर के रेवटी में कार्यरत इस महिला को 3 साल से मात्र 1500 में काम करवाया जा रहा था और अब जब इन्हें इन सब का लाभ मिलने वाला था तो इन्हें नौकरी से निकलने की बात की जा रही उनको 7 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है और उसके जगह किसी और को 7500 प्रति महीने में नियिक्त करने की बात की जा रही है। 7 दिन का अल्टीमेटम तो खत्म हो गया लेकिन वहाँ के छोटे स्तर केअधिकारी कर्मचारी अपने नेतागिरी वाले आदर से बाज नहीं आ रहे हैं अब देखना ये है कि न्याय किसको ओर कैसे मिलती है ।सत्य को कितना परेशान होना पडता है।

ऐसा क्या हो जाता है कि एक स्वीपर पिछले 3 साल अपना सेवा महज 1500 में दे रही उसका कोइशिकायत नहीं होता है लेकिन जब बात कलेक्टर दर पर 75000 रुपये महीना तनख्वाह देने की बात आती है तो अचानक से उसके ख़िलाफ़ एक सोची समझी साजिश के तहत फ़साने का प्रयाश किया जाता है और उसको नोकरी से निकाल देंव की बात की जाती है।

बता दें एक तरफ वर्मा के जीवन यापन का एक मात्र सहारा ये आया व दाई का काम है है इसमें भी लोग नहा धोकर उसके पीछे पड़े हैं उसके पास जीवन यापन का कोई सहारा नई ये भी उच्चाधिकारियों को रास नही आ रही है उनके 3 बचे खाने को तरस रहे हैं दूसरी उसके पिता लकवाग्रस्त हैं।

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