छत्तीसगढ़

कलेक्टर ने नोडल अफसरों की बैठक लेकर की धान खरीदी की समीक्षा

प्रकाश यादव:

अब तक 32 हज़ार किसानों से 1.22 मीट्रिक टन धान की खरीदी

खरीदी केंद्रों पर कलेक्टर का काम करेंगे नोडल अफसर

कसडोल: कलेक्टर कार्तिकेया गोयल ने यहां जिला पंचायत सभा कक्ष में धान खरीदी केन्द्रों के नोडल अफसर, सहकारिता एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर धान खरीदी कार्य में अब तक की प्रगति की समीक्षा की।

उन्होंने इस साल धान खरीदी शुरू होने से लेकर पिछले पखवाड़े भर तक के अनुभव के आधार पर खरीदी केंद्रों की व्यवस्था में और कसावट लाने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि नोडल अफसर की भूमिका खरीदी केंद्रों पर कलेक्टर के प्रतिनिधि की होती है।

लिहाजा राज्य सरकार के तमाम निर्देशों के अनुरूप खरीदी व्यवस्था और अभिलेखों का रख-रखाव सुनिश्चित करना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है। कृषि विभाग के आरएईओ अथवा पटवारियों को जिले की सभी 151 धान खरीदी केंद्रों पर नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अब तक 32 हज़ार 353 किसानों से 1.21 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी

बताया गया कि जिले में अब तक 32 हज़ार 353 किसानों से 1.21 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। कलेक्टर ने धान के उठाव और परिवहन में तेज़ी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर श्री गोयल ने बैठक में कहा खरीदी केंद्रों पर एक-एक बारदानें का हिसाब मिलना चाहिए। बारदानें का इधर-उधर होना गड़बड़ी का सूचक हो सकता है। पूरा बारदाना खरीदी स्थल पर ही रहे। बिलाईगढ़ के कुछ केंद्रों पर बारदाना के समिति कार्यालय में रखे जाने की शिकायत मिली है।

नोडल अफसर रात में जाते समय बारदाने पंजी में मिलान कर दस्तखत करके जायें।उन्होंने तीन श्रेणी के बारदानों की पहचान के सम्बंध में बताया। कलेक्टर ने कहा कि धान की सम्पूर्ण आवक का उसी दिन स्टैकिंग करना है। स्टैकिंग ऐसा हो कि बोरों की आसानी से गणना की जा सके।

डनेज के ऊपर ही लगाई जाएगी बोरोन की थप्पी (स्टैकिंग)

सामान्यतः 15 गुना 12 लंबाई-चौड़ाई के होने चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण डनेज के ऊपर ही बोरोन की थप्पी (स्टैकिंग) लगाई जाएगी। बिना डनेज के स्टैकिंग पर पूर्ण प्रतिबंध है। यदि पक्का चबूतरा पर स्टैकिंग की गई है, तब भी डनेज सुनिश्चित करना होगा। डनेज सामान्यतः जमीन और स्टैक के बीच भूसी-पैरा का लेयर होता है। कलेक्टर ने कहा कि स्टैकिंग पूर्ण होने के बाद ही नोडल अधिकारी खरीदी केंद्र छोड़ेंगे।

डिप्टी कलेक्टर एवं जिला खाद्य अधिकारी राकेश गोलछा एवं एएफओ अनिल जोशी ने बताया कि किसानों द्वारा लाये गये धान को केंद्र पर पहले ढेरी लगाना है। बगैर ढेरी लगाये खरीदना नहीं है। ढेरी लगने पर ही उसका गुणवत्ता परीक्षण हो सकेगा।

किसान की बोरी से सीधे समिति की बोरी मे उड़ेल कर तोलना नियमों के बाहर है। तौलने के बाद बोरे की सिलाई हाथ से करना है। मशीन की सिलाई नहीं चलेगा। सिमगा के कुछ केंद्रों पर मशीन सिलाई किये जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे निकालकर फिर से हाथ सिलाई करने कहा गया।

बोरे पर सामने की साइड में ऊपर की ओर मार्का लगाने के निर्देश दिए गए। नोडल अफसरों ने पिछले 15 दिनों के अनुभव के आधार पर अपनी शंकाओं का समाधान भी किया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर जोगेंद्र नायक, जिला पंचायत सीईओ आशुतोष पांडेय, उप पंजीयक डीआर ठाकुर, सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी धनराज पुरबिया भी उपस्थित थे।

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