कलेक्टर वर्मा ने आज पहाड़ की चढ़ाई कर सड़क निर्माण कार्य को देखा

सड़क बनाने पहाड़ ने दी मौन सहमति, 250 अबादी के साथ ही अन्य लोगों को मिलेगा फायदा

नारायणपुर : अबूझमाड़ के घने जंगलों के बीच चारों तरह से पहाडि़यों से घिरा ताड़नार गांव करीब 250 की आबादी वाले इस गांव में अब जिला प्रशासन ने आवागमन की सुविधा के लिए कुकड़ाझोर से ताड़नार तक सड़क कटिंग कार्य शुरू कर दिया है । यह गांव नेड़नार पंचायत के अधीन है। कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा आज शनिवार को भरी धूप में ताड़नार के हाथी मत्था जैसे पहाड़ की चढ़ाई कर सड़क निर्माण कार्य को देखा। कलेक्टर के इस हौसले के सामने पहाड़ भी नतमस्तक हुआ। पहाड़ ने भी सड़क बनाने की मौन सहमति दी। कार्य प्रशासन की बेहतर कार्य योजना, जनप्रतिनिधियों जन सहयोग से ही संभव हो रहा है। कलेक्टर की अपरिहार्य कारणों से ताड़नार गांव के निवासियों से मिलने की इच्छा अधूरी रही।

उनकी यह कसक चेहरे पर साफ झलक रही थी। कलेक्टर ने कुकड़ाझोर से राशन लेते आती महिलाओं से बातचीत की और ताड़नार सुविधाओं की जानकारी ली। महिलाओं ने बताया कि वे राशन लेने ताड़नार से कुकड़ाझोर आती जाती रहती है। कलेक्टर केे पूछने पर उन्होंने बताया कि आने जाने में लगभग चार से साढ़े घंटे का समय लगता है। रास्ता भी वेहद असुरक्षित उबाड़-खाबड़ और झाड़ी युक्त है। सड़क बन जाने से उनके आने जाने में बहुत आसानी होगी। अभी छोटी-छोटी घरेलु सामग्रियों के लिए कुकड़ाझोर या नेड़नार जाना पड़ता है। वर्मा ने कहा कि जल्दी सड़क निर्माण पूरा कर लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि वे आज किसी कारण वर्ष उनके गांव ताड़नार नहीं पहुंच सके लेकिन जल्द ही आकर वहीं के निवासियों से रू-ब-रू होंगे।

बतादें कि कुकड़ाझोर से ताड़नार तक लगभग 3 किलोमीटर सड़क का निर्माण सड़क कटिंग (पहाड़ की कटिंग) कर खनिज न्यास मद से बनाने की मंजूरी जिला प्रशासन मुखिया टोपेश्वर वर्मा ने दी है। सड़क निर्माण पर लगभग 20 लाख रूपए खर्च होंगे। इसके बन जाने से ताड़नार में बसे लगभग 50 परिवारों के 250 निवासियों के साथ ही अन्य लोगों को आने-जाने के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी। वर्तमान में अभी निवासी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और राशन आदि के लिए कुकडाझोर उबड़-खाबड़, पखडंडि़यों जंगल-झाडि़यांे से होकर गुजरकर अधिक दूरी तय करते है। सड़क बन जाने से राज्य सरकार की सभी जरूरी सुविधाओं के साथ ही लोगों को राशन पहुंचाने में आसानी होगी और निवासियों को अधिक दूरी तय नहीं करनी पडे़गी ।

उल्लेखनीय है कि जब अबूझमाड़ के इलाके में बहारी लोगांे पर आना प्रतिबद्ध था । अबूझमाड़ के इलाके में प्रवेश के लिए कलेक्टर से अनुमति लेने का निमय बना दिया गया था । प्रवेश के इस प्रतिबंध को कई सालों बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2009 में समाप्त कर दिया । अब यहां विकास की गंगा बहाने के लिए प्रदेश सरकार कटिबद्ध है। विकास को रफ्तार देने में जिला प्रशासन पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ महत्ती भूमिका अदा कर रहा है।

यहां बताना मुनासिब होगा कि अबूझमाड़ और निवासी अपने आदिमकालीन युग में जीवन जी रहे थे। लेकिन शासन और प्रशासन के साथ ही जनसहयोग तथा जागरूकता के कारण यहां के आदिवासियों के रहन-सहन में परिवर्तन आया है। अब अबूझमाड़ प्रगति के राह में आगे बढ़ने को बेताब दिखाई दे रहा है। यहां के लोग अब सड़क, नेटकनेक्टिविटी की मांग करने आगे आ रहे है। छत्तीसगढ़ में माओंवादियों का गढ़ कहा जाने वाला नाराणपुर जिले का अबूझमाड़ ऐसा इलाका है। जहां राजस्व सर्वेक्षण कार्य बेहद कठिन रहा है। लेकिन राज्य सरकार इस काम को पूरा करने के लिए दृढ़संकल्प लिए दिखाई दे रही है। इस अवसर एसडीएम दिनेश कुमार नाग, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास के.एस. मसराम, जनपद पंचायत सीईओ जनपद ओरछा सहित अन्य अधिकारी साथ थे।

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