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व्यावसायिक कोयला खनन से शुरू होगा छत्तीसगढ़ में प्रगति का नया दौर: प्रल्हाद जोशी

यह देष की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका अदा करता है।

रायपुर : केंद्रीय कोयला और खान मंत्री श्री प्रल्हाद जोषी ने षुक्रवार को कहा कि कोयला मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ सरकार के व्यावसायिक कोयला खनन के लिए प्रस्तावित आबंटन में राज्य की 05 कोयला खदानों के स्थान पर 03 अन्य खदानों को षामिल करने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ की 09 कोयला खदानें व्यावसायिक कोयला खनन के तहत आबंटन हेतु प्रस्तावित हैं। श्री जोषी अपने छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान रायपुर में प्रदेष के मुख्यमंत्री श्री भूपेष बघेल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से मुखातिब हो रहे थे।
मुख्यमंत्री से मिलने के बाद श्री जोषी ने कहा कि बैठक बेहद सकारात्मक, प्रगतिषील एवं खुले विचारों से हुई।

हमने राज्य में कोयला एवं अन्य खनिजों से जुड़े मुद्दों पर मंत्रणा की। माननीय मुख्यमंत्री ने डीएमएफ एवं एनएमईटी को लेकर कुछ अच्छे सुझाव दिए, जिन पर हम सकारात्मक नजरिए के साथ विचार करेंगे।

मुख्यमंत्री के साथ बैठक में यह भी निर्णय लिया गया

मुख्यमंत्री के साथ बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), छत्तीसगढ़ सरकार एवं (एमएएचएजीईएनसीओ) के अधिकारियों वाली एक समिति से 15 दिनों के अंदर छत्तीसगढ़ ईस्ट रेलवे लिमिटेड (सीईआरएल) की एक रेलवे लाइन को षिफ्ट करने का प्रस्ताव लिया जाएगा।

साथ ही, एीएमपीडीआई और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारी एक महीने के भीतर खनन की गई जमीन पर फ्लाई एष डंप करने का एक प्रस्ताव देंगे। कोयले के फुटकर ग्राहकों को कोयले की आपूर्ति सुनिष्चित करने के लिए राज्य एक नोडल एजेंसी भी गठित करेगा।

मीडिया से बात करते हुए श्री जोषी ने कहा कि व्यावसायिक कोयला खनन की षुरूआत के साथ छत्तीसगढ़ में प्रगति एवं विकास का एक नया दौर षुरू होगा। व्यावसायिक कोयला खनन के लिए आबंटन हेतु प्रस्तावित कोयला खदानों से राज्य को एक साल में कम से कम 4,400 करोड़ रूपये का राजस्व और 2,000 करोड़ रूपये का न्यूनतम प्रीमियम प्राप्त होगा।

एसईसीएल के उच्च अधिकारियों के साथ कंपनी के प्रदर्षन की समीक्षा की

साथ ही, राज्य के लोगों के लिए रोजगार के लगभग 60,000 अतिरिक्त अवसर भी पैदा होंगे। इसके अतिरिक्त राज्य को डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाऊंडेषन (डीएमएफ) मद में भी हर साल 25 करोड़ रूपये मिलेंगे, जिसका उपयोग कोलफील्ड्स के आसपास के क्षेत्रों के समावेषी विकास में किया जाएगा।

उन्होंने एसईसीएल के उच्च अधिकारियों के साथ कंपनी के प्रदर्षन की समीक्षा की और कोयला निकासी से जुड़े मुद्दों पर रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने देष में व्याप्त मौजूदा महामारी स ेउपजी तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच भी पिछले कुछ महीनों में कोल योद्धाओं द्वारा किए गए कठिन परिश्रम की भूरी-भूरी प्रषंसा की। इस दौरान श्री जोषी ने राज्य के स्पंज आयरन एवं स्टील उद्योगों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की और इस क्षेत्र से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर उनकी फीडबैक ली।

छत्तीसगढ़ के लिीए कोयला खनन के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के पास एषिया की सबसे बड़ी कोयला खदान है और यह देष की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका अदा करता है। साथ ही, कोयला खनन छत्तीसगढ़ की प्रगति एवं विकास की आकांक्षाओं को पूरा करने में भी मदद करता है।

पूंजीगत निवेष करने की योजना

एसईसीएल ने पिछले 04 वर्षों में राज्य के कोष में 13,200 करोड़ रूपये से अधिक का राजस्व दिया है। साथ ही, कोयला उत्पादन में बढ़ोत्तरी के साथ एसईसीएल छत्तीसगढ़ को अगले 04 वर्षों में लगभग 22,900 करोड़ रूपये के राजस्व का योगदान देगी। एसईसीएल की होल्डिंग कंपनी, सीआईएल की छत्तीसगढ़ में अगले 04 वर्षों के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में 26,000 करोड़ रूपये का पूंजीगत निवेष करने की योजना है।

कोयले की त्वरित एवं निर्बाध निकासी के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे नए इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के प्रयायसों को रेखांकित करते हुए श्री जोषी ने कहा कि एसईसीएल, इरकाॅन एवं सीएसआईडीसी का साझा उपक्रम सीईआरएल एक रेल काॅरिडोर का निर्माण कर रही है।

इस परियोजना पर सीईआरएल ने अभी तक 2,000 करोड़ रूपये से अधिक का पूंजीगत निवेष किया है।
गौरतलब है कि सीईआरएल रेल काॅरिडोर का निर्माण देष की बढ़ती हुई ऊर्जा जरूरतों के मद्देनजर भविष्य में बढ़े हुए कोयला उत्पादन की निकासी और इस क्षेत्र की यात्री ट्रेनों की सुविधा देने के लिए किया जा रहा है।

निर्माण दो फेस में किया जा रहा है

इस रेल काॅरिडोर की कुल लंबाई 193 किलोमीटर है और इसका निर्माण दो फेस में किया जा रहा है। फेस-। में खरसिया से धरमजयगढ़ तक 131 किलोमीटर लंबा रेल रूट विकसित किया जा रहा है, जबकि फेस-।। का 62 किलोमीटर का रेल मार्ग धरमजयगढ़ को आगे कोरबा तक जोड़ेगा। फेस-। के खरसिया से कोरीछापर तक के 43 किलोमीटर लंबे भाग पर मालगाड़ियों का आवागमन षुरू हो चुका है।

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