नक्सल प्रभावित छह जिलों में कम्यूनिटी शिक्षा ने बदला छात्रों का भविष्य

समुदाय को जागरूक करने और बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने का यह अभियान गांव में दस-दस दिन के लिए चलाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित छह जिलों में कम्यूनिटी शिक्षा ने छात्रों के भविष्य की तस्वीर को बदल कर रख दिया है।

यह पहल सुकमा, कोंडागांव, कांकेर, राजनांदगांव, कवर्धा और महासमुंद में ‘प्रथम संस्था” ने की है।

संस्था ने सात ब्लाक के 210 गांव में शिक्षा की जोत जलाने के लिए पहली बार शिक्षक और समुदाय को साथ लेकर पढ़ाई का एक नया पैटर्न तैयार किया है।

समुदाय को जागरूक करने और बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने का यह अभियान गांव में दस-दस दिन के लिए चलाया जा रहा है।

इसमें बच्चों को परिवार के सदस्यों के साथ खेल-खेल में नए तरीके से पढ़ाई कराई जा रही है।

यह तरीका शिक्षा के उस पैटर्न से एकदम उलट है, जिसमें छात्रों को क्लास रूम में बोझ के बीच पढ़ना होता है।

प्रथम संस्था के देवेश दुबे ने बताया कि संस्था के कार्यकर्ता स्कूल में जाकर शिक्षक के साथ मिलकर बच्चों को पढ़ाते हैं।

उनके सवालों का हल उनके स्तर के अनुसार खेल के माध्यम से देते हैं।

पहली बार स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

इसमें छह वर्ष के बच्चों को उनके माता-पिता के साथ स्कूल और पढ़ाई के बारे में प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कम्यूनिटी शिक्षा में परिवार की बूढ़ी दादी को भी प्रारंभिक शिक्षा दी जा रही है, जिससे वह बच्चों को पढ़ाई के वैज्ञानिक तरीके से जोड़ने में सफल हो रही है।

गांव में चौपाल बनाकर बुजुर्गों को एक साथ कक्षा के अनुसार बच्चों को पढ़ाने के लिए ट्रेंड किया जा रहा है।

खास बात यह है कि गांव में अधिकांश बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं और शिक्षकों की कमी के कारण प्रारंभिक शिक्षा के बाद स्कूल से दूर हो जाते हैं।

कम्यूनिटी श्ािक्षा मिलने के बाद परिवार के सदस्य बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।

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