रकम दोगुनी करने का लालच देकर कंपनी ने लूटे 10 लाख

उपभोक्ता फोरम ने ठोका हर्जाना

रायपुर।

प्रदेशभर में फाइनेंस और इंश्योरेंस कंपनियों की मनमानी जगजाहिर है। ये कंपनियां उपभोक्ता को सिर्फ लाभ के बिंदु बताकर पॉलिसी देते हैं। लेकिन परिपक्वता अवधि पूरी होने पर जब उपभोक्ता राशि लेने जाता है तो उन्हें तमाम तरह के नियम-कायदे बताकर घुमाया जाता है। इसी तरह के एक मामले में जिला उपभोक्ता फोरम रायपुर ने फाइनेंस कंपनी पर 12 लाख 63 हजार 850 रुपए हर्जाना ठोका है।

आदेश के मुताबिक पवन कुमार जायसवाल (32) अरिहंत नगर रायपुर निवासी को माइक्रो फाइनेंस कंपनी लिमिटेड फरिश्ता कॉम्पलेक्स ने रुपए दोगुना करने का लालच देकर जुलाई 2011 से 30 हजार रुपए प्रतिमाह जमा कराया। पवन ने तीन साल तक 30 हजार रुपए कंपनी में जमा किया।

6 जून 2014 की स्थिति में पवन 10 लाख 80 हजार रुपए जमा कर चुका था। अब माइक्रो कंपनी की ब्याज के साथ राशि लौटाने की बारी आई वह मुकर गया। अपनी जमा राशि को पाने के लिए पवन माइक्रो फाइनेंस कंपनी के महीनों चक्कर काटता रहा। बावजूद उसे अपने जमा पैसे नहीं मिले। थकहार कर पीडि़त ने मामले को जिला फोरम रायपुर के समक्ष प्रस्तुत किया।

कंपनी के खिलाफ हुई कार्रवाई

जिला फोरम की सदस्य प्रिया अग्रवाल ने बताया कि पीडि़त पवन कुमार जायसवाल द्वारा संपूर्ण दस्तावेज के साथ केस फोरम के समक्ष रखा गया। इसमें पवन ने माइक्रो फाइनेंस कंपनी को 36 महीने तक 10 लाख 80 हजार रुपए जमा किए। 30 जुलाई 2014 को जब कंपनी द्वारा उपभोक्ता को जमा राशि लौटाने की बारी आई तो उसे राशि नहीं लौटाई गई।

सदस्य प्रिया ने बताया कि मामले में फोरम के अध्यक्ष उत्तरा कुमार कश्यप की अध्यक्षता में फैसला सुनाते हुए कंपनी को जमा राशि 12 लाख 51 हजार 850 रुपए ब्याज के साथ, मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए 10 हजार रुपए, 2000 अधिवक्ता शुल्क के साथ 12 लाख 63 हजार 850 रुपए जुर्माना लगाया है।

चिटफंड कंपनी की तरह काम

इंश्योरेंस और फाइनेंस कंपनियों की बढ़ती मनमानी को लेकर पत्रिका ने 10 जनवरी को खबर प्रकाशित की थी। साथ ही शासन प्रशासन द्वारा इन कंपनियों पर कड़ाई न बरते जाने की बात से भी अवगत कराया था। इंश्योरेंस व फाइनेंस कंपनियां कई तरह से कार्य करती है।

जहां इंश्योरेंस कपंनियां मेडिकल, वाहन, मोबाइल के साथ ही अन्य तरह के इंश्योरेंस करती है। वहीं चिटफंड कंपनी की तर्ज पर कई फाइनेंस कंपनियां लोगों को गलत जानकारी देकर रुपए जमा कराती है। लेकिन लौटाने के समय या तो मुकर जाती है या उपभोक्ताओं को चक्कर काटने पर मजबूर कती है। जिससे वे परेशान होकर खुद ही क्लेम छोड़ दें।

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