कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को कहा खोखला

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने किया कटाक्ष

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को खोखला कहते हुए कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी के ज्ञान का सार यह था कि उनके बस का कुछ नहीं है और लोग अपनी जान की रक्षा खुद करें।

उन्होंने ट्वीट किया, ”आज रात 8.45 बजे के ज्ञान का सार -:मेरे बस का कुछ नहीं, यात्री अपने सामान यानी जान की रक्षा स्वयं करें।” कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने एक बयान में कहा, ”राष्ट्र के नाम प्रधानमंत्री का संबोधन फिर से खोखली बात ही रहा। देश अप्रत्याशित और गंभीर संकट का सामना कर रहा है…इतने लोगों की मौत हो रही है कि श्मशानों और कब्रस्तानों में जगह नहीं बची है।”

उन्होंने कहा, ”प्रधानमंत्री से उम्मीद थी कि वह यह बताएंगे कि उनकी सरकार ने अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाने, ऑक्सीजन की आपूर्ति और जरूरी दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए क्या किया है।

बहरहाल, उन्होंने अपनी सारी जिम्मेदारियों से पीछे हटने और भारत को बचाने का दायित्व गैर सरकाराी संगठनों, युवाओं और बाल मित्रों को सौंपने का चुनाव किया। माकन ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने राज्यों से लॉकडाउन नहीं लगाने की सलाह देते हुए अपनी जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर डाल दी।”

आज रात 8.45 बजे के ज्ञान का सार -:
“मेरे बस का कुछ नही,
यात्री अपने सामान यानी जान की रक्षा स्वयं करें।”#COVID19
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कहा, ”प्रधानमंत्री के भाषण का सार यह है: लोगों की अपनी जिम्मेदारी खुद की है। अगर आप इससे पार पा लेते हैं तो किसी उत्सव और महोत्सव में जरूर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभकामनाएं। ईश्वर आपकी रक्षा करे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को कहा कि कोरोना की दूसरी लहर तूफान बनकर आई है। हालांकि उन्होंने राज्यों को यह भी सलाह दी कि कोरोना से मुकाबले के लिए लॉकडाउन का इस्तेमाल अंतिम विकल्प के रूप में किया जाए। राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की संभावना को खारिज किया और राज्यों को भी इससे बचने की सलाह दी।

कोरोना से लड़ते-लड़ते अपनी जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए उन्होंने कहा, ”कोरोना के खिलाफ देश आज एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। कुछ सप्ताह पहले तक स्थितियां संभली हुई थी और फिर यह कोरोना की दूसरी लहर तूफान बन कर आ गई है। जो पीड़ा आपने सही है या जो पीड़ा आप सह रहे हैं उसका मुझे पूरा अहसास है।”

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