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‘वोट बैंक’ साहू : कांग्रेस जीती तो ताम्रध्वज साहू बन सकते हैं मुख्यमंत्री

कुर्मी समाज की प्रतिमा चंद्राकर का टिकट काट साहू समाज को रिझाया

रायपुर।

31 अक्टूबर को कांग्रेस के 19 प्रत्याशियों की सूची जारी हुई। अधिकांश लोगों पर इसका असर ज्यादा नहीं दिखा लेकिन दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में साहू समाज के लोगों के चेहरे अलग खिले हुए से लगे। वजह यह कि कांग्रेस ने दुर्ग से पूर्व घोषित प्रत्याशी प्रतिमा चंद्राकर का टिकट काटकर छत्तीसगढ़ से अपने इकलौते सांसद ताम्रध्वज साहू को प्रत्याशी बना दिया था।

राजनीतिक रूप से बेहद जागरूक साहू समाज के लिए इससे बड़ी खुशी की बात और कुछ नहीं हो सकती थी। इस समाज के सभी स्रंगठन अपने ही बीच के किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री प्रत्याशी के तौर पर देखना चाहते थे। उन्होंने अपने चैनलों से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक यह बात पहुंचा भी दी थी। ताम्रध्वज साहू का राजनीतिक कद निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ में काफी ऊँचा है। वह कर्नाटक चुनावों में स्क्रीनिंग कमिटी के अध्यक्ष भी रहे थे।

साहू समाज की मांग मानने में कांग्रेस को फायदा दिखा। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और प्रदेश में कांग्रेस मामलों के प्रभारी पीएल पुनिया के तनाव और इनकी गुटबाजी से इसके कार्यकर्ता भ्रमित थे। वहीं, कांग्रेस विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव की लाइन हमेशा अलग ही रही है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अध्यक्ष राहुल गांधी इस माहौल से खुश नहीं थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया और अन्य कांग्रेसियों से बातचीत तो ​की — बघेल, पुनिया और सिंहदेव — सभी दिल्ली तलब भी किए गए लेकिन राहुल ने अपने ही चैनलों पर भरोसा किया। इन चैनलों के जरिए मिले फीडबैक के आधार पर दु्र्ग के सांसद ताम्रध्वज साहू को टिकट देने का निर्णय लिया गया। इसे तत्काल कांग्रेस के ‘साहू कार्ड’ के रूप में देखा और समझा गया।

भाजपा ने भी साहू समाज के 14 प्रत्याशियों को अपना टिकट दिया है लेकिन साफ सुथरे और गैर विवादित छवि वाले ताम्रध्वज साहू को आगे लाकर कांग्रेस इस समाज को यह संकेत देने में सफल रही है कि अगर यह साहू समाज कांग्रेस की जीत पक्की करे तो इसके ​ही किसी सदस्य को पहली बार राज्य का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल सकता है।

कांग्रेस का यह दांव निश्चित रूप से भाजपा को हैरान करने वाला रहा। इस दांव का ही नतीजा रहा कि भाजपा पिछले तीन दिनों से अपनी रणनीतिक सोच में बदलाव के लिए सिलसिलेवार बैठकों में उलझी हुई है। उसे सत्ता विरोधी लहर का भी पूरा अहसास है।

अगर साहू समाज ताम्रध्वज साहू के साथ हो गया तो निश्चित रूप से यह भाजपा के लिए बेहद कष्टदायी स्थिति होगी। चूंकि कुर्मी समाज पहले ही भाजपा समर्थक नहीं रहा, सो अब साहू समाज का ध्यान भी कांग्रेस की ओर जाना इसके लिए बुरे सपने से कम नहीं है।

कुल मिलाकर, एआईसीसी अध्यक्ष राहुल गांधी ने काफी समझदारी के साथ साहू समाज को रिझाने और भितरखाने असंतोष—तनाव से बचने के लिए ताम्रध्वज साहू को आगे कर दिया है। वह पार्टी के ओबीसी विभाग के चीफ भी हैं। ऐन मौके पर उनको मैदान में उतारने के पीछे एक वजह भूपेश बघेल हैं।

कुर्मी समाज से आने वाले बघेल के खिलाफ पार्टी में असंतोष है। शिकायतें दिल्ली तक पहुंची हैं। टिकट बंटवारे में उन्होंने ओबीसी और खासकर कुर्मियों को मौका दिया। वहीं, कुर्मी प्रत्याशी और बघेल की करीबी प्रतिमा चंद्राकर का टिकट काटकर कांग्रेस ने जता दिया है कि इस बार साहू समाज अपने ही किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनता देख सकता है, बशर्ते यह समाज पूरे राज्य में कांग्रेस को अपना समर्थन दे।

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