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BJP के धान को लेकर बयानों पर कांग्रेस का पलटवार

किसानों को 2500 मिलने पर भाजपा के पेट में तकलीफ क्यों?

रायपुर। भाजपा किसान मोर्चा के पूनम चंद्राकर और अन्य बयानबाजी भाजपा नेताओं द्वारा की जा रही बयानबाजी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एक ओर भाजपा के छत्तीसगढ़ के रमन सिंह जी जैसे नेता भाजपा के सांसद साजिश रचकर सरकार पर लगातार छत्तीसगढ़ सरकार को 2500रू. न देने के लिये कहने पर दबाव बनाये हुये है।

भाजपा के सांसदों ने एक बार भी कहीं भी यह नहीं कहा कि यदि छत्तीसगढ़ सरकार यदि किसानों को मोदी सरकार के 1815 रू. के ऊपर की राशि अपने संसाधनों से दे रही है तो इसमें केन्द्र सरकार को बाधा नहीं डालनी चाहिये।

जब राज्य सरकार समर्थन मूल्य के अतिरिक्त दिये जाने वाले राशि का भुगतान अपने संसाधनों से करना चाहती है तो इसमें भाजपा की अडंगेबाजी क्यों? भाजपा के सांसद बतायें कि किसान हित में केन्द्र सरकार को यह बाधा में नहीं डालने के लिये क्यों नहीं कहते? भाजपा के सांसद समझ लें इन्हीं किसानों के वोटों और दयानतदारी के दम पर वे सांसद बने है और मोदी प्रधानमंत्री सघीय ढांचे में यह राज्य का अधिकार और केन्द्र का दायित्व है।

केन्द्र राज्य के किसानों के हितों का अनदेखा करती रही। भाजपाक सांसदों की बोलती बंद रही। छत्तीसगढ़ के किसानों को 1815 रू. के बजाय यदि धान की कीमत 2500 रू. मिल जायेगी तो इसमें भाजपा की केन्द्र सरकार को ऐतराज क्यों है?

भाजपा और मोदी सरकार के किसान विरोधी रवैय्ये के चलते छत्तीसगढ़ के किसानों में भाजपा के प्रति नारजगी है। यदि मोदी सरकार फसलों का उचित समर्थन मूल्य घोषित करती, तो राज्य सरकार को बोनस देना ही नहीं पड़ता। मोदी और भाजपा सरकार के तो कांग्रेस सरकार को किसानहित में काम करने के कारण प्रात्साहित करना चाहिये लेकिन पूंजीपति और चंद बड़े औद्योगिक घरानों के ईशारों पर चलने वाली भाजपा किसानों का भला नहीं चाहती है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्य सरकार के द्वारा बार-बार अनुरोध किये जाने के बावजूद राज्य के कोटे में बढ़ोत्तरी नहीं की गयी। कांग्रेस मांग करती है कि राज्य में उत्पादित चावल का अधिशेष 32 लाख टन केन्द्र सरकार उपार्जित करने की घोषणा को छत्तीसगढ़ के इस चावन का उपयोग देश में राशन दुकानों से वितरण के जरिये भूखमरी और कुपोषण से निपटने के लये किया जाये। भाजपा सरकार में देश में कुपोषण तेजी से बढ़ा भी है।

किसी फसल पर बोनस देने की घोषणा करना राज्य सरकार का अधिकार है और केन्द्र सरकार की यह शर्त छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारों को हनन है। छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ बड़ा भेदभाव है।

न तो मोदी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार फसलों के सी-2 लागत के डेढ़ गुना मूल्य पर फसल खरीदने और सभी किसानों को कर्ज मुक्त करने के वादे पर आज तक अमल नहीं किया है।

किसानों को राहत देने और उसकी मद्द करने के बजाए मोदी सरकार ने अंबानी, अडानी जैसे कार्पोरेट घरानों का कर्ज माफ किया है, जिन्होंने योजनाबद्ध तरीके से बैंकों में आम जनता के रखे 15 लाख करोड़ रूपये हड़प लिये है। वहीं बड़े औद्योगिक घरानों को मोदी सरकार टैक्स में छूट के नाम पर हर साल 6 लाख करोड़ रूपये अपनी तिजोरी में भरने देती है।

प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि धान बोनस न देने पर ही केन्द्रीय पूल में चावल लेने के मोदी सरकार के फैसले की कांग्रेस ने तीखी निंदा की है। इस शर्त से केन्द्र सरकार का किसान विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। मोदी सरकार की यह हरकत भाजपा के किसान विरोधी चरित्र का जीता जागता सबूत है।

केन्द्र की भाजपा सरकार के कृषि भवन से भारत सरकार के अंडर सेकेटरी 19 दिसंबर 2019 को जारी किया गया पत्रक्रमांक 3(17)/2019 -च्ल्-1 को पत्र भाजपा की मोदी सरकार का किसान विरोधी और छत्तीसगढ़ विरोधी चरित्र का जीता जागता सबूत है।

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