छत्तीसगढ़राजनीति

कोंटा में कांग्रेस का किला ढहाने भाजपा को बहाना पड़ेगा पसीना

-प्रदीप शर्मा

रायपुर।

छत्तीसगढ़ बनने के बाद बस्तर संभाग की जिस सीट पर अब तक भाजपा अपना खाता नहीं खोल पाई है उसमें कोंटा विधानसभा शामिल है। अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित कोंटा विधानसभा सीट पर वर्तमान में कांग्रेस के कवासी लखमा विधायक चुने गए हैं।

साल 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कवासी लखमा को अपना उम्मीदवार बनाया था। जिन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सीपीआई के मनीष कुंजाम को 17398 मतों से हराया। कांग्रेस के कवासी लखमा को 32067 मत मिले वहीं सीपीआई के मनीष कुंजाम को 14669 मतों से संतोष करना पड़ा। भाजपा के बुधराम सोढी 16.80 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 10452 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे।

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने पुराने चेहरे कवासी लखमा को दोबारा मैदान में उतारा वहीं भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए पदम नंदा को प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में कांग्रेस के कवासी लखमा 192 मतों के मामूली अंतर से अपनी जीत बचा पाने में कामयाब रहे।

कांग्रेस के कवासी लखमा को 21630 मत मिले वहीं भाजपा के पदम नंदा को 21438 मतों से संतोष करना पड़ा। सीपीआई के रामा सोढी 30.12 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 20751 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे।

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए धनीराम बारसे को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन भाजपा की चाल कामयाब नहीं हो सकी और कांग्रेस तीसरी बार अपनी जीत बचाने में बचाने में सफल रही। कांग्रेस के कवासी लखमा ने भाजपा के धनीराम बारसे को 5786 मतों से हराया। कांग्रेस के कवासी लखमा को 27610 मत मिले वहीं भाजपा के धनीराम बारसे को 21824 मतों से संतोष करना पड़ा। सीपीआई के मनीष कुंजाम 26.15 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 19834 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे।

आने वाले विधानसभा चुनाव में इस कांग्रेस की ओर कवासी लखमा ही मैदान में होंगे, वहीं भाजपा अपना प्रत्याशी बदल सकती है। कोंंटा विधान सभा में सीपीआई अब तक वोट शेयर के मामले में तीसरे स्थान पर रही है। इस बार जोगी-बसपा गठबंधन और आम आदमी पार्टी भी मैदान में है। ऐसे हालात में बहुकोणीय मुकाबले के आसार हैं।

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