कांग्रेस ने डॉ रमन सिंह को दिया 10 बिंदुओं में जवाब, प्रेस विज्ञप्ति जारी, पढ़िये पूरी खबर…

रायपुर. छत्तीसगढ़ के पूर्व मंख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ईडी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दिए गए शपथपत्र के संबंध में दी गई प्रेस रिलीज का उत्तर कांग्रेस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी है। उन्होंने 10 बिंदुओं में जवाब दिया है।

1 यदपि ईडी के किसी शपथपत्र की आधिकारिक जानकारी राज्य सरकार के पास नही है। परंतु यदि ईडी ने कोई ऐसा शपथ दिया है जैसा कि डॉ रमन सिंह ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा है तो उसका झूठ इसी बात से प्रमाणित है कि ईडी केन्द्र सरकार की एजेंसी है और राज्य सरकार ईडी के कार्यो में कोई हस्तक्षेप नही कर सकती है। इसलिए राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा ईडी के प्रकरण को अपने प्रभाव का दुरूपयोग करके कमजोर करने का आरोप पूरी तथ्यहीन और झूठा है।

2 डॉ आलोक शुक्ला को राज्य सरकार द्वारा संविदा नियुक्ति पूरी तरह से नियमों का पालन करके दी गई है। बीजेपी ने इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में एक याचिका लगाई थी जो माननीय उच्च न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी है। उसके बाद बीजेपी ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील की है जो अभी माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसी स्थिति में इस प्रकार के अनर्गल आरेाप लगाना एक पूर्व मुख्यमंत्री को शोभा नही देता है।

3 अनिल टूटेजा सचिव के पद पर नही है बल्कि संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत है। पूर्व मुख्यमंत्री को सचिव और संयुक्त सचिव का अंतर तो ज्ञात होगा। वैसे भी भारत के कानून में जब तक कोई न्यायालय में दोषी सि न हो जाए तब तक उसे निर्दोष माना जाता है और सजा नही दी जाती है।

4 ईडी बीजेपी के इशारों पर काम कर रही है यह इस बात से भी सिध्द है कि जहां एक ओर डॉ रमन सिंह ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा है कि ईडी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को हलफनामा सील कवर में दिया गया है। वहीं दूसरी ओर उन्होंने प्रेस रिलीज में यह भी बताया है कि हलफनामें में ईडी ने क्या लिखा है। ऐसा प्रतीत होता है कि हलफनामा डॉ रमन सिंह और बीजेपी के नेताओं के कहने से ही बनाया गया है।

5 यह तो सभी जानते हैं कि केन्द्र सरकार लगातार ईडी और सीबीआई जैसी केन्द्रीचय एजेंसियों का राजनीतिक दुरूपयोग करती रही है और राज्य सरकारों के अधिकारियों को प्रताड़ित करती रही।

6 जहां तक नान के प्रकरण का प्रश्न है इस प्रकरण में एसीबी ईओडब्ल्यू द्वारा पूर्व में ही माननीय न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया जा चुका है और प्रकरण माननीय के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए इस प्रकरण में भी राज्य सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नही की जानी है।

7 ईडी ने आरोप लगाया है कि सरकार के अधिकारियों द्वारा अपने प्रभाव का दुरूपयोग करने के कारण गवाह पलट रहे हैं। सच यह है कि 151 गवाहों की गवाही माननीय न्यायालय में जनवरी 2019 के पूर्व ही हो चुकी थी और उसके पश्चात किसी की भी गवाही नही हुई है इसमें से अधिकांश की गवाही पूवर्वती बीजेपी सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इसलिए वर्तमान सरकार के अधिकारियों द्वारा अपने प्रभाव का दुरूपयोग करने का प्रश्न ही नही उठता है। सच यह है कि तत्कालीन एसीबी ईओडब्ल्यू के अधिकारियों द्वारा इन गवाहों के बयान लिए बिना ही उनकी ओर से झूठे और बनाए गए प्रकरण में लगा दिए गए थे और इन गवाहों ने माननीय न्यायालय में आकर सच्चाई बताई है।

8 पूर्ववती बीजेपी सरकार के राजनीतिक प्रभाव के दुरूपयोग के कारण एबीबी ईओडब्ल्यू के भ्रष्ट अधिकारियों ने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह उनके परिवार के सदस्यों और नजदीकी अधिकारियों को बचाने के लिए वर्ष 2011 से 2014 तक नान में भ्रष्टाचार के दस्तावेजी प्रमाण मिलने पर भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नही की है। वर्ष 2011 से 2014 के बीच हुए भ्रष्टाचार के दस्तावेजी प्रमाण एसीबी ईओडब्ल्यू के पास है। उन्हीं की विधिवत जांच करने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी अपनी जांच के प्रतिवेदन लगातार माननीय उच्च न्यायालय में प्रस्तत करती रही है। जांच पूरी होनें पर जांच के परिणाम के अनुसार कार्यवाही करके माननीय न्यायालय को अवगत कराया जाएगा।

9 यह भी आश्चर्य का विषय है कि डॉ रमन सिंह की मुकेश गुप्ता के साथ इतनी सहानुभूति क्यो हैं जबकि इन मुकेश गुप्ता के अनेक अपराधों में संलग्न होनें की एफआईआर दर्ज है और पत्नी के रूप में अवैध साथ रह रही महिला की हत्या तक का आरोप उस पर है। मुकेश गुप्ता के बारे में यह बात तो सभी को पता है कि अवैध रूप से फोन टेपिंग कराने में माहिर थे कहीं ऐसा तो नही कि मुकेश गुप्ता ने डॉ रमन सिंह के बहुत सारे राज फोन टैपिंग कर के अपने पास जमा कर रखे हैं। इसलिए मुकेश गुप्ता के पक्ष में बोलना डॉ रमन सिंह की मजबूरी बन गया है।

10 भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई संबंधित एजेंसियों एसीबी ईओडब्लयू द्वारा अपने स्तर पर की जाती है। इसमें सरकार का कोई दखल नही होता है।

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