Clipper Analysis : कांग्रेस महाधिवेशन : दम भरा पार्टी में, प्रहार किए भाजपा पर

राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार हो रहे कांग्रेस महाधिवेशन में पार्टी के अंदर ऊर्जा फूंकने का प्रयास किया गया. अगले आम चुनाव से पहले पार्टी अपने को पूरी तरह से तैयार कर लेना चाहती है इसलिए इस 84वें महाधिवेशन में देशभर के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया था. सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधा तो लोकसभा में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस के अंदर की कमियों को उजागर किया.

सोनिया गांधी ने कहा कि हम ‘प्रतिशोध, पक्षपात एवं अहंकार मुक्त भारत’ बनाने का प्रयास करेंगे. सोनिया गांधी शायद भाजपा के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ जुमले पर पलटवार कर रही थी. उन्होंने केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा के नेताओं पर अहंकारी होने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता सत्ता के मद में चूर है. लेकिन हम उनके आगे नहीं झुकेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के लोगों ने कांग्रेस को तबाह करने की पूरी कोशिश की. साम, दाम, दंड, भेद से हमें नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया. लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी मजबूती से डटी रही.

सोनिया गांधी ने कहा कि हम एक महान पार्टी से जुड़े हुए हैं. यह ऐसा राजनीतिक दल है जो आगे की सोच रखता है इसलिए मैं चाहती हूं कि कांग्रेस फिर से ऐसी पार्टी बने जो देश का एजेंडा तय करें. इसी क्रम में उन्होंने पार्टी के नेताओं से अपेक्षा की कि कर्नाटक में होने वाले चुनाव में पार्टी ऐसा प्रदर्शन करे कि देश की राजनीति को नयी दिशा मिले.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोलते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ या ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा, जैसे नारे सिर्फ ‘ड्रामेबाजी’ है और यह सब वोट हासिल करने की एक चाल है.

महाअधिवेशन के उद्घाटन भाषण में नव – नियुक्त पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी उतने आक्रामक नहीं दिखे जितनी उनकी मां सोनिया गांधी थी. राहुल ने कहा कि कांग्रेस ही देश को दिशा दिखाएगी. उन्होंने कांग्रेस और भाजपा के बीच अंतर भी बताया. उनका कहना था भाजपा लोगों को तोड़ने का काम करती है जबकि कांग्रेस लोगों को जोड़ती है. राहुल बोले कि देश में गुस्से का वातावरण बनाया जा रहा है. एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से लड़ाया जा रहा हैं. कांग्रेस का निशान ‘हाथ’ लोगों को जोड़ने का काम करता है.

एक और महत्वपूर्ण बात राहुल ने अपने भाषण में की. उन्होंने कहा कि हम बदलाव लाने के लिए युवाओं को आगे बढ़ा रहे हैं लेकिन वह आगे तभी बढ़ेंगे जब अनुभवी और बुजुर्ग नेता साथ हो. यह इस बात का संकेत है कि बुजुर्ग नेताओं को हाशिए पर नहीं डाला जा रहा है. राहुल के अध्यक्ष पद संभालने के बाद पार्टी के बड़े बुजुर्ग नेताओं में यह बड़ी चिंता थी जिसे आज राहुल ने दूर कर दिया.

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी के ऐसे नेताओं की खिंचाई की जो एक दूसरे की टांग खींचते हैं. उन्होंने अपने भाषण में कहा कि कांग्रेस की हार की वजह कांग्रेस ही है. हमारे नेता मुख्यमंत्री और मंत्री बनने के लिए एक कांग्रेसी दूसरे कांग्रेसी नेता को हराने की कोशिश करते हैं. यह सब बंद होना चाहिए.

मल्लिकार्जुन खड़गे की बात कड़वी थी लेकिन इसमें पूरी सच्चाई है. कांग्रेस नेताओं के बीच मतभेद उस ऊंचाई तक पहुंचे रहते है जिसके तहत वह सामने वाले को कम, साथ वाले को बड़ा दुश्मन मानते हैं.

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