छत्तीसगढ़

धान खरीदी के हर मोर्चों पर विफल नजर आ रही कांग्रेस सरकार

रिपोर्ट : शिव कुमार चौरसिया

गंगाजल की कसम खाकर सत्ता में आई कांग्रेस सरकार धान खरीदी के हर मोर्चों पर विफल नजर आ रही है । पहले 2500 में धान खरीदी का वादा करके मुकर गई । यहीं नहीं रुकी धान खरीदी की तिथि को 01 दिसंबर 2019 कर दिया गया था जिसके कारण early वैरायटी के धानो के लिये बड़ी दिक्कत हो रही है। इससे कांग्रेस सरकार की मंशा साफ झलक रही है कि पूरा प्रयास किया जा रहा है कि किसानों का धान कम खरीदा जा सके ।

पिछले कई सालों से जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी तब काफी व्यवस्थित तरीके से धान खरीदी होती थी । गांव में कोठार एवं कोठी की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो गई थी। हार्वेस्टर से सीधे सोसायटी तक जाता था किसान भाइयों का धान ।

किसानों के पंजीकृत रकबा को कम करके यह प्रयास

आप देखेंगे कि किसानों का पंजीकृत रकबा कम कर दिया गया है जो कि कांग्रेस सरकार की तानाशाही का नया नमूना हमें देखने को मिल रहा है । कई समाचार हमें देखने को मिल रहा है जैसे 22 एकड़ के किसी किसान का रकबा 90 डिसमिल हो गया है ।

सारंगढ तहसील में सभी किसान तहसीलदार के सामने अपना आक्रोश व्यक्त कर चुके हैं । कई बार ये लॉजिक दिया जा रहा है कि मेड़ को रकबा नहीं माना जायेगा । ऐसा पहली बार हो रहा है कि मेड़ को रकबा नहीं मानने की बात कही जा रही है । ये प्रदेश में तानाशाही ढंग से रकबा को कम करने का प्रयास किया जा रहा है ।

धान को गांजा की तरह पकड़ा जा रहा

पहले छत्तीसगढ़ में यह व्यवस्था थी कि छोटे-छोटे गल्ला किराना की दूकानों में गरीब दुकान में जाकर अपना कुछ धान बेचकर अपनी जरूरत की चीजों जैसे – साबुन, चना, मिक्सचर इत्यादि को खरीदता था।

आज वैसे ही छोटे- छोटे किराना दुकानों में छापा मारा जा रहा है कि कहीं उन गल्ला किराना वालों के पास एक मुट्ठी धान तो कोई नहीं ला रहा । किसान भी भयभीत महसूस कर रहा है कि ये सरकार तो ऐसे कार्यवाही कर रही है जैसे सरकार की नजर में किसान का धान गांजा है ।

अचानक धान खरीदी बंद के निर्देश देना दुर्भाग्यजनक

पिछले 3 – 4 दिनों में कांग्रेस की सरकार ने स्वेच्छाचारिता की सारी हदों को पार कर दिया है । अचानक धान खरीदी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं , अचानक टोकन काटना बंद कर दिया गया है, एक टोकन में 50 क्विंटल से अधिक धान नहीं बेच पा रहा है ,

एक किसान 3 बार से अधिक धान नहीं बेच पायेगा ।इस तरह की तानाशाही इस सरकार के द्वारा चलाई जा रही है और पूरा प्रयास किया जा रहा है कि किसानों का धान कैसे भी करके पूरा न खरीदा जा सके ।

कांग्रेस सरकार के तानाशाही रवैया से सहकारी समिति पृथक

रायगढ़ जिले के सहकारी समितियों के कर्मचारी त्रस्त हो गए हैं। किसानों की समस्याओं का सामना करने के लिये मुख्यमंत्री, कोई मंत्री, या कलेक्टर सामने खड़ा नहीं है बल्कि सहकारी समिति के कर्मचारी ही किसानों के सामने खड़े हैं ।

एक तरफ त्रस्त किसानों के आक्रोश का उन्हें सामना करना पड़ रहा है वहीं पुलिस और प्रशासन लगातार उन्हें FIR करने की धमकी दे रहे हैं । कोई भी आदेश लिखित न देकर मौखिक दिया जा रहा है । इन परिस्थितियों में रायगढ़ जिला के सहकारी समिति के कर्मचारियों ने कल दिनाँक – 09/12/2019 , दिन- सोमवार से स्वयं को धान खरीदी से पृथक करने का निर्णय लिया है ।

इन परिस्थितियों में भारतीय जनता पार्टी किसानों और कर्मचारियों के साथ खड़ी है ।किसानों और कर्मचारियों की समस्याओं को आवाज देने के लिए 13 दिसंबर को एकदिवसीय जिला स्तरीय विशाल धरना का आयोजन किया जाएगा और मुख्यमंत्री जी के नाम से प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा ताकि सरकार को किसानों की समस्याएं सुनाई और दिखाई दें । भाजपा ने धरने मेंं किसान बंधुओ को शामिल होने का आह्वान किया है।

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