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आरक्षण विरोधी रही है कांग्रेस जानबूझ कर हारी है हाईकोर्ट में मुकदमा: भाजपा

रायपुर. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट द्वारा स्थगनादेश जारी करने के बाद इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला है. कौशिक ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी अपने ओछे राजनीतिक पाखंड से बाज नहीं आई और अब कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र ही बेनकाब हो गया है.

नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि आरक्षण का मसला कांग्रेस के लिए कभी सामाजिक उत्थान और संवेदना का विषय रहा ही नहीं है. उसने इसे महज अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करने का काम किया है. आरक्षण से जुड़े प्रदेश सरकार ने अपने ही फैसले को लेकर जिस तरह अपने लोगों को सामने करके हाईकोर्ट में याचिका दायर करवा पिछड़ा वर्ग के लोगों के साथ धोखाधड़ी की है, वह कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र ही है. कौशिक ने कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर जिन लोगों ने याचिका दायर की है, उनकी राजनीतिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि व संबंधों के साथ ही उनकी पहचान जगजाहिर होनी चाहिए ताकि प्रदेश सरकार का आरक्षण विरोधी एजेंडा बेनकाब हो.

नेता प्रतिपक्ष श्री कौशिक ने कहा कि कांग्रेस तो शुरू से आरक्षण के खिलाफ रही है, हालांकि जाहिराना तौर पर वह आरक्षण को अपने राजनीतिक हितों के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती रही. कांग्रेस ने देश के आजादी के बाद से सन् 1990 तक केवल संसद-विधान मंडलों में ही आरक्षण की व्यवस्था कायम रखी. सरकारी नौकरियों में आरक्षण तो भाजपा समर्थित पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल में दिया गया और तब कांग्रेस विपक्ष में थी. इसी से साफ है कि आरक्षण को लेकर कांग्रेस हमेशा दोहरा मानदंड अपनाती रही है.

नेता प्रतिपक्ष श्री कौशिक ने कहा कि प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार ने जिस दिन आरक्षण संबंधी यह निर्णय पारित किया था, वह उस दिन से तय कर बैठी थी कि इस आरक्षण का लाभ उसे किसी को देना नहीं है लेकिन इसका दिखावा करके अपने राजनीतिक स्वार्थ साधना था. इसीलिए अपने ही लोगों से प्रदेश सरकार के लोगों ने ओबीसी आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर करवाई और मजे की बात यह है कि जिस दिन इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में निर्णायक सुनवाई हो रही थी, प्रदेश के महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा कोर्ट में मजबूती से सरकार का पक्ष रखने के लिए उपस्थित ही नहीं थे! श्री कौशिक ने यह भी जानना चाहा कि महाधिवक्ता उसी दिन क्यों और किनके कहने पर कोर्ट में अनुपस्थित थे, इसकी भी पड़ताल होनी चाहिए.

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