कृषि उर्वरकों के दामों में वृद्धि को लेकर कांग्रेस नेता और कृषि मंत्री चौबे प्रदेश के किसानों को ग़ुमराह कर उकसा रहे : भाजपा

यूपीए और भाजपा की केंद्र सरकार के शासनकाल में खाद की कीमतों का तुलनात्मक ब्योरा देते हुए किसान मोर्चा प्रदेश प्रभारी ने कहा- कृषि मंत्री खाद की क़ीमतों के ग़लत आँकड़े दे रहे हैं

खाद के दाम सात साल से स्थिर, इस अवधि में समर्थन मूल्य तथा विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक लाभ पहुँचाकर केंद्र सरकार ने किसानों को बेहतर जीवन स्तर प्रदान किया है : शर्मा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश प्रभारी संदीप शर्मा ने कृषि उर्वरकों के दामों में वृद्धि को लेकर कांग्रेस नेताओं और कृषि मंत्री रवींद्र चौबे पर प्रदेश के किसानों को ग़ुमराह कर उकसाने का आरोप लगाया है। शर्मा ने यूपीए शासनकाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के शासनकाल में खाद की कीमतों का तुलनात्मक ब्योरा देते हुए कहा कि कांग्रेस गठबंधन के शासनकाल की तुलना में खाद के दाम भाजपा शासनकाल में सात साल से स्थिर रहे और इन सात सालों में लगातार कृषि उपजों के समर्थन मूल्य तथा अन्य अनेक विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक लाभ पहुँचाकर केंद्र की भाजपा सरकार ने किसानों को बेहतर जीवन स्तर प्रदान किया है।

भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रभारी श्री शर्मा ने बताया कि यूपीए शासनकाल में सन 2014 में डीएपी 1350रुपए, एनपीके 1270 रुपए और एनओपी (पोटाश) 945 रुपए में बिक रही थी, जिसके दाम घटाकर प्रधानमंत्री श्री मोदी की सरकार ने क्रमश: 1250 रु., 1185 रु. और 840 रुपए किया और ये दाम बिना वृद्धि के पिछले सात वर्षों से स्थिर हैं। अब सात साल के बाद इन उर्वरकों के दाम क्रमश: 1800 रु., 1747 रु. और 1000 रु. प्रति बोरी किया गया है, जबकि सुपर फास्फेट अब भी पुराने दाम 370 रुपए पर ही बाज़ार में उपलब्ध है।

श्री शर्मा ने कहा कि जिन उर्वरकों की मूल्यवृद्धि हुई है, सन 2014 से उसकी तुलना की जाए तो यह वृद्धि औसतन 30 प्रतिशत ही है। अगर प्रतिवर्ष इनकी क़ीमतें 04 से 05 फ़ीसदी बढ़तीं तो मूल्यवृद्धि का यह प्रतिशत 35 होता। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश के कृषि मंत्री चौबे ने डीएपी का मूल्य 1900 रु. और सुपरफास्फेट के दाम में 37 रु. बढ़ोतरी की बात कही है, जबकि डीएपी आज बाज़ार में 1800 रु. में मिल रही है और सुपरफास्फेट का तो दाम आज भी पूर्ववत ही है। कृषि मंत्री चौबे पर खाद की क़ीमतों के ग़लत आँकड़े दे रहे हैं।

भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रभारी श्री शर्मा ने कहा कि पिछले सात वर्षों में केंद्र सरकार ने विभिन्न कृषि उत्पादों के समर्थन मूल्य में अब तक 45 से 80 प्रतिशत बढ़ोतरी की है जो किसानों को इन सात सालों में क्रमश: बढ़ती दर पर मिला। धान का समर्थन मूल्य सन 2014 के 1310 रु. के मुक़ाबले आज 1888 रु. और गेहूँ का समर्थन मूल्य 1380 रु. के मुक़ाबले आज 1975 रु. हो गया है। इन दोनों मुख्य फसलों के समर्थन मूल्य में 45 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

श्री शर्मा ने बताया कि देशभर के किसानों को पिछले तीन साल से 60 से 65 हज़ार करोड़ रुपए सालाना के हिसाब से 02 लाख करोड़ रुपए किसान सम्मान निधि के तौर पर सीधे किसानों के खातों में जमा हुए। इस प्रकार विभिन्न योजनाएँ लागू कर केंद्र सरकार ने किसानों को आर्थिक मज़बूती प्रदान की है। श्री शर्मा ने यह भी बताया कि कृषि दवा के तौर पर काम आने वाला नोमीनो गोल्ड सन 2014 में 8500 रु. प्रति लीटर मिल रहा था जिसकी क़ीमत घटाकर भाजपा की केंद्र सरकार ने 4500 रुपए प्रति लीटर कर दी है जिससे निंदानाशक कार्य में किसानों को बड़ा फ़ायदा हो रहा है। इसी तरह खाद के दामों में जो बढ़ोतरी हुई है, उसके एवज़ में अभी किसानों को आगामी ख़रीफ़ व रबी फसल के बढ़ने वाले समर्थन मूल्य का लाभ भी मिलेगा।

भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रभारी श्री शर्मा प्रदेश के कृषि मंत्री चौबे को नसीहत दी है कि वे प्रदेश के किसानों को ग़ुमराह करने के बजाय इस बात की चिंता करें कि सन 2018 में प्रदेश में भाजपा शासनकाल के दौरान जो धान 1400-1500 रु. प्रति क्विंटल बिकता था, वही धान इस वर्ष 2020-21 में 1200 रुपए में क्यों बिका? इसी तरह प्रदेश में भाजपा शासनकाल में रबी फसल का धान समर्थन मूल्य से 100 रु. कम में बिका लेकिन वही धान आज कांग्रेस शासन में 600 रु. कम में क्यों बिका? श्री शर्मा ने कहा कि फ़िज़ूल की बयानबाजी कर किसानों को ग़ुमराह करने के बजाय प्रदेश के कृषि मंत्री और कांग्रेस नेताओं को किसानों के साथ हो रही लूट को रोकने पर ध्यान देना चाहिए।

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