अपनी तरफ से पाँच पैसे की भी राहत न देने वाली कांग्रेस पार्टी को पेट्रोल डीजल पर प्रदर्शन का नैतिक अधिकार नही : कौशिक

नेता प्रतिपक्ष कौशिक का पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों को लेकर कांग्रेस द्वारा किये जा रहे धरना-प्रदर्शन पर पलटवार

ढाई साल की विफलताओं से ध्यान भटकाने की ओछी हरक़तें, भाजपा की प्रदेश सरकार ने अक्टूबर 2018 में हुए राज्य सरकार के हिस्से की राशि में से राहत दी थी, सरकार बनते ही मुख्यमंत्री ने वापस ले लिया

रायपुर। विंधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक ने पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों को लेकर कांग्रेस किये जा रहे धरना-प्रदर्शन पर पलटवार करते हुए कहा है कि पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों को लेकर बजाय चीख-पुकार मचाने के कांग्रेस नेता अपनी सरकार पर राज्य सरकार को मिलने वाले टैक्स में कटौती करके प्रदेश के नागरिकों को राहत पहुँचाने के लिए अपनी राज्य सरकार पर दबाव बनाने में क्यों हिचकिचा रहे हैं?

कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में प्रदेश के लोगों को पाँच नए पैसे की राहत देने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है और राजनीतिक प्रलाप कर वे इस मुद्दे की आड़ में अपनी सरकार के ढाई साल की विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने की ओछी हरक़तें कर रहे हैं। श्री कौशिक ने कहा कि पेट्रोल-डीज़ल पर वैट में राज्य सरकार का हिस्सा तो होता ही है, केंद्र को मिलने वाली राशि का भी 42 प्रतिशत भाग भी राज्यों को वापस मिलता है।

प्रदेश सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रति लीटर पेट्रोल-डीज़ल पर राज्य सरकार की कितनी कमाई होती है और प्रदेश सरकार इस टैक्स की राशि में से प्रदेश के पेट्रोल-डीज़ल उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं देना चाहती? श्री कौशिक ने कहा कि उनके भाजपा की पूर्ववर्ती प्रदेश सरकार ने अक्टूबर 2018 में लोगों को राहत देते हुए राज्य सरकार के हिस्से की राशि में से प्रदेश को लोगों को 2.5 रु प्रति।

लीटर की राहत प्रदान की थी, जिसमें केंद्र सरकार का भी समान अंशदान जुड़कर जनता को प्रति लीटर पाँच रुपए की राहत मिली थी। श्री कौशिक ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा दी जा रही राहत को कांग्रेस की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री बघेल ने वापस ले लिया और अब प्रदेश के लोगों को बजाय राहत देने के मुख्यमंत्री बघेल पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों को अपने लिए राजनीतिक अवसर बनाने की ओछी राजनीतिक नौटंकी कर रहे हैं, सत्ता पक्ष को जनता काम करने और जनता को राहत देने के लिए चुनती है न कि धरना करने।

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