कांग्रेस विरासत बचाने… तो भाजपा लड़ेगी आरपार की जंग

लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र

सारंगढ़ में बसपा बड़ा फैक्टर

त्रिकोणीय मुकाबला 

खरसिया में जीत हासिल करने

भाजपा के आगे चुनौती

केराबाई मनहर

उमेश पटेल रायगढ़ जिले की सारंगढ़ विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। इस सीट पर बसपा की दमदार मौजूदगी भाजपा और कांग्रेस की बीच जीत-हार की बाजी को प्रभावित करती रही है। बसपा की कामता जोल्हे साल 2003 में जीत हासिलकर विधानसभा में पहुंची थी। वहीं खरसिया में आजादी के बाद से अब तक कांग्रेस का कब्जा रहा है।
अविभाजित मध्यप्रदेश में यहां हुए 1988 के उपचुनाव में कांग्रेस विधायक लक्ष्मी प्रसाद पटेल से इस्तीफा देकर तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के लिए सीट खाली की थी। इस उपचुनाव में भाजपा ने जशपुर कुृमार दिलीप सिंह जूदेव को मैदान में उतारा था। इस चुनाव में कांग्रेस के अर्जुन सिंह ने भाजपा के दिलीप सिंह जूदेव तीन हजार से ज्यादा मतों से हराया था। उसके बाद से खरसिया में कांग्रेस का ही कब्जा बना हुआ। कांग्रेस के दिवंगत विधायक नंदकुमार पटेल यहां से लगातार पांच बार चुनाव जीतते रहे हैं। वर्तमान में यहां से उनके पुत्र उमेश पटेल विधायक चुने गए हैं।

रायपुर: रायगढ़ जिले में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सारंगढ़ विधानसभा सीट से बसपा, कांग्रेस और भाजपा के विधायक जीत कर विधानसभा चुनाव में पहुंचे रहे हैं। साल 2003 के विधानसभा चुनाव में सारंगढ़ से बसपा की कुमारी कामता जोल्हे ने त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा के श्याम सुंदर को 8159 मतों से हराया। वहीं कांग्रेस को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। बसपा की कामता जोल्हे को 32577 मत मिले वहीं भाजपा के श्याम सुंदर को 24419 मतों से संतोष करना पड़ा।

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने दोनों ने अपने उम्मीदवार में बदलाव करते हुए नए चेहरे को मैदान में उतारा। इस चुनाव में जीत की बाजी कांग्रेस के पक्ष में रही और भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस की पदमा घनश्याम मनहर ने भाजपा के शमशेर सिंह को सीधे मुकाबले में 10845 मतों से हराया। कांग्रेस की पदमा घनश्याम मनहर को 61659 मत मिले वहीं भाजपा के शमशेर सिंह को 50814 मतों से संतोष करना पड़ा।

2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नए चेहरे को मौका दिया और भाजपा की चाल कामयाब रही। भाजपा की महिला उम्मीदवार केराबाई मनहर यहां से जीत हासिल करने में सफल रही, वहीं कांग्रेस ने दोबारा पदमा घनश्याम मनहर को अपना उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में एंटीइनकम्बेसी फैक्टर की वजह से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में भाजपा की केराबाई मनहर ने कांग्रेस की पदमा घनश्याम मनहर को 15844 मतों से हराया। भाजपा की केराबाई मनहर को 81917 मत मिले वहीं कांग्रेस की पदमा घनश्याम मनहर को 66127 मतों से संतोष करना पड़ा।

आजादी के बाद से अब तक कांग्रेस का गढ़ रहा है खरसिया

अघरिया (पटेल) बाहुल्य खरसिया विधानसभा सीट आजादी के बाद से कांग्रेस का गढ़ रही है। साल 1990, 1993, 1998 तक लगातार जीत हासिल करने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता नंदकुमार पटेल 2003 में लगातार चौथी बार जीत कर विधानसभा में पहुंचे। उन्होंने सीधे मुकाबले में भाजपा के लक्ष्मी प्रसाद पटेल को 32768 मतों से हराया। कांग्रेस के नंदकुमार पटेल को 70433 मत मिले वहीं भाजपा के लक्ष्मी प्रसाद पटेल को 37665 मतों से संतोष करना पड़ा।

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नंदकुमार पटेल ने पांचवी बार खरसिया विधानसभा चुनाव में अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। इस चुनाव में भाजपा ने महिला उम्मीदवार लक्ष्मीदेवी पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन भाजपा कांग्रेस का किला भेद पाने में कामयाब नहीं हो सकी। भाजपा को पांचवी बार भी कांग्रेस से हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस के नंद कुमार पटेल ने सीधे मुकाबले में भाजपा की लक्ष्मीदेवी पटेल को 33420 के रिकार्ड मतों से हराया। कांग्रेस के नंदकुमार पटेल को 81497 मत मिले वहीं भाजपा की लक्ष्मीदेवी पटेल को 33420 मतों से संतोष करना पड़ा।

झीरम घाटी में नक्सली हमले में शहीद हुए थे नंदकुमार पटेल

बताते चलें कि खरसिया विधानसभा सीट से लगातार पांच बार जीत का रिकार्ड बनाने वाले कांग्रेस विधायक नंदकुमार पटेल 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सली हमले में शहीद हो गए थे। साल 2013 के चुनाव कांग्रेस ने स्व. नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल को अपना प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में उमेश पटेल 38886 के रिकार्ड मतों से जीत कर विधानसभा तक पहुंचे। उन्होंने सीधे मुकाबले में भाजपा के जवाहर लाल नायक को हराया। कांग्रेस के उमेश पटेल को 95470 मत मिले वहीं भाजपा के जवाहर लाल नायक को 56582 मतों से संतोष करना पड़ा।

आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उमेश पटेल पर अपने पिता की विरासत बचाने की जिम्मेदारी होगी तो भाजपा के सामने जीत की चुनौती। फिलहाल भाजपा का चेहरा इसबार कौन होगा, सियासतदारों को इसका इंतजार है।

Tags
Back to top button