सरकार किसानों को सूखा राहत देने में गम्भीर नहीं : कांग्रेस

सचिव सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सूखा प्रभावित किसानों की मदद के मामले में भी गम्भीर नहीं है अभी तक सरकार ने जो राहत और मदद की घोषणाएं की है वे टालमटोल करने वाली और कागजी मदद मात्र है। सरकार ने सूखा ग्रस्त क्षेत्रो में इस वर्ष लगान वसूली में छूट देने की घोषणा कर अपनी पीठ थपथपा लिया लेकिन हकीकत में इस छूट से किसानों को कोई फर्क नही पड़ने वाला। उन्होंने कहा कि सरकार के सूखा राहत के नाम पर मनरेगा में रोजगार 100 दिन से बढ़ा कर दो सौ दिन करने की घोषणा भी छलावा मात्र है। पहले भी रमन सरकार ने मनरेगा में 150 दिन काम देने का खूब प्रचार किया था लेकिन हकीकत में छत्तीसगढ़ मनरेगा में रोजगार देने के मामले में फिसड्डी साबित हुआ है। मनरेगा के राष्ट्रीय विश्लेषणों के अनुसार मनरेगा के माध्यम से रोजगार देने के राष्ट्रीय औसत 57 दिन के मुकाबले छत्तीसगढ़ सरकार मनरेगा में मात्र 46 दिन ही रोजगार उपलब्ध करवा पाती है। सुशील आनंद की माने तो इन आकड़ो की पुष्टि सीएजी की विधानसभा में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में भी होती है। भाजपा सरकार पिछले वर्षों के मनरेगा की मनरेगा की मजदूरी का भुगतान अभी तक नही कर पाई है ऐसे में अकाल के समय मनरेगा के रोजगार दिनों में बढ़ोतरी बेमायने हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार सूखे के हालात को गम्भीरता से ले यह राज्य की लगभग दो तिहाई आबादी के लिए जीवन-मरण का सवाल है। कोरी घोषणाएं करने के बजाय ठोस पहल की जाये। कांग्रेस मांग करती है कि फसल बीमा राशि का तुरन्त भुगतान करवाया जाये। सिचाई के पम्पो को 24 घण्टे मुफ्त बिजली तुरन्त देना शुरू किया जाये। बांधो जलाशयों से तत्काल पानी छोड़े जाये। मनरेगा के रोजगार मुलक काम नगद भुगतान के साथ तुरन्त शुरू किया जाये। मनरेगा का पिछले वर्षों बकाया भुगतान तुरन्त दिया जाये। बिजली बिल के बकाया राशि को माफ किया जाये, जिन किसानों के पम्पो के कनेक्शन बिल के भुगतान न होने के कारण काट दिए गए थे उनको जोड़ा जाए। रबी के पारम्परिक फसलो के अलावा वैकल्पिक खेती करने की इच्छुक किसानों को खाद, बीज परामर्श आदि निशुल्क सरकार उपलब्ध कराए। जरूरत मन्द किसानों को ब्याज मुक्त ऋण दिया जाये। इस वर्ष धान बिक्री के लिए पंजीयन की अनिवार्यता खत्म की जाये।

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