छत्तीसगढ़

‘प्रत्यक्ष रोजगार के साथ ही आजीविका के लिए मनरेगा से जल, जंगल और जमीन का संरक्षण-संवर्धन’

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने रेडियो पर दी मनरेगा के विभिन्न पहलुओं की जानकारी
रायपुर: पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने रेडियो पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। शाम साढ़े सात बजे आकाशवाणी रायपुर से प्रसारित विशेष कार्यक्रम ‘हमर ग्रामसभा’ में उन्होंने प्रदेश में मनरेगा के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों और इसकी उपलब्धियों के बारे में बताया।

उल्लेखनीय है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री सिंहदेव ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, निमोरा द्वारा तैयार विशेष रेडियो कार्यक्रम ‘हमर ग्रामसभा’ के माध्यम से हर सप्ताह विभाग से जुड़े किसी एक विषय पर श्रोताओं से रू-ब-रू होते हैं। आकाशवाणी रायपुर से प्रसारित इस कार्यक्रम को प्रदेश में आकाशवाणी के सभी केंद्र एक साथ रिले करते हैं। बस्तर के श्रोताओं के लिए जगदलपुर केंद्र से कार्यक्रम का प्रसारण हल्बी और छत्तीसगढ़ी में किया गया। वहीं आकाशवाणी के अन्य केंद्रों से छत्तीसगढ़ी में इसका प्रसारण किया गया।

श्री सिंहदेव ने ‘हमर ग्रामसभा’ में बताया कि मनरेगा ने कोरोना काल में ग्रामीण अर्थव्यवथा को गतिमान बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई है। कोविड-19 के चलते राष्ट्रव्यापी लॉक-डाउन के दौरान ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर काम देने के साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लौटे प्रवासी श्रमिकों को तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने में इस योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ मनरेगा में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाला अग्रणी राज्य है। इस वर्ष शुरूआती पांच महीनों में ही साल भर के कुल लक्ष्य साढ़े 13 करोड़ मानव दिवस के विरूद्ध नौ करोड़ 22 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन किया गया है। इस दौरान प्रदेश के 70 हजार से अधिक परिवारों को 100 दिनों से अधिक का रोजगार मुहैया कराया गया है। वन अधिकार पत्रधारियों को रोजगार देने में छत्तीसगढ़ देश में सबसे आगे है। पूरे देश में जितने वन अधिकार पत्रधारियों को मनरेगा के तहत काम दिया गया है, उनमें से आधे परिवार केवल छत्तीसगढ़ के हैं।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ने कार्यक्रम में बताया कि मनरेगा ग्रामीणों को सीधे रोजगार देने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने का भी काम कर रहा है। इसके अंतर्गत जल, जंगल और जमीन जैसे आजीविका के प्रमुख साधनों के संरक्षण-संवर्धन के सैकड़ों काम किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मनरेगा में प्रदेश में महिलाओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। रोजगार पाने वाले श्रमिकों में आधे से ज्यादा श्रमिक महिलाएं हैं। योजना के तहत 50 दिन काम कर चुकी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान एक महीने की मजदूरी का भुगतान बिना काम के किया जाता है ताकि गर्भवती महिला और नवजात शिशु की बेहतर देखभाल हो सके।

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