वायु की गुणवत्ता में लगातार गिरावट, राष्ट्रीय राजधानी में सूचकांक 316 दर्ज

प्रदूषण पर निगरानी के लिए 6 सदस्यीय कमेटी गठित

नई दिल्ली :

केंद्र द्वारा संचालित सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (एसएएफएआर) के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 316 दर्ज की गई जो ‘‘खराब’’ श्रेणी में आता है।

दिल्ली में वायु की गुणवत्ता में लगातार गिरावट का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा। राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 316 दर्ज की गई, जो बेहद खराब गुणवत्ता का सूचकांक है। धूल कणों में भी इजाफा हुआ है।

सफर के आंकड़ों के अनुसार साल में पहली बार सूचकांक 316 के स्तर पर पहुंचा है। गुरुवार को आनंद विहार में हवा की गुणवत्ता 317, द्वारका सेक्टर-8 में 353, आईटीओ पर 295, जहांगीरपुरी में 336 जबकि रोहिणी में 344 के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान पीएम-2.5 और पीएम-10 के स्तर में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह हवा और भी प्रदूषित हो रही है। पीएम-10 289 जबकि पीएम-2.5 137 रिकॉर्ड किया गया।

गौरतलब है कि इमरजेंसी प्लान के लागू के बाद भी प्रदूषण का स्तर दिनोंदिन बिगड़ रहा है। अगर, हालात को जल्द काबू नहीं किया जा सका तो आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो सकती है।

मुख्य तौर पर वाहनों से होने वाले प्रदूषण, निर्माण गतिविधियों सहित पराली जलाने की वजह से हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। पिछले दिनों के दौरान हवा के रुख में होने वाले बदलाव से दिल्ली इससे और भी अधिक प्रभावित होने लगा है।

दिल्ली सरकार ने गुरुवार को वायु प्रदूषण को रोकने से जुड़े निगरानी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है। इसके लिए एक छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तहत लागू की जा रही योजनाओं पर निगरानी रखने के साथ प्रगति की समीक्षा भी करेगी।

पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने बताया कि छह सदस्यीय कमेटी में राजस्व विभाग, दिल्ली पुलिस, एमसीडी, एनडीएमसी, पीडब्ल्यूडी व डीपीसीसी के अधिकारी शामिल हैं। वे खुद भी डीपीसीसी के सदस्य सचिव के साथ नजर बनाए रखेंगे।

इस दौरान कमेटी देखेगी कि प्रदूषण से निपटने की तैयारी कितनी है और संबंधित एजेंसियां इसके लिए क्या कदम उठा रही हैं। सभी संबंधित एजेंसियों को ग्रैप के अलग-अलग स्तर पर अपनी तैयारियों का खाका तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

हुसैन ने बताया कि सभी एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वह सड़क की मैकेनिकल स्वीपिंग (यांत्रिक सफाई) करें। वहीं, पानी का छिड़काव भी किया जाए। इससे धूल के महीने कणों को वातावरण में जाने से रोका जा सकेगा। इसके अलावा निर्माण एजेंसियों से कहा है कि वह निर्माण स्थलों पर ढंकने के साथ पानी का नियमित तौर पर छिड़काव करें।

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