आशा के विपरीत हो सकता है योगी सरकार की निकाय चुनाव परीक्षा परिणाम !

आशा के विपरीत हो सकता है योगी सरकार की निकाय चुनाव परीक्षा परिणाम !

शैलेन्द्र गुप्ता शैली

उत्तर प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के मतदान में योगी सरकार की अंतिम चरण की परीक्षा आज पूरी हो गई किंतु लगता है कि मतदान सूचियों में किसी सुनियोजित साजिश के तहत एक पार्टी विशेष के समर्थक समझे जाने वाले मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए जाने की खबरों से खासकर भाजपा का चुनावी गणित का परिणाम आशा के विपरीत हो सकता है।

फ़िरोज़ाबाद जिले में मतदाता सूचियों से काफ़ी संख्या में वोटों की सफ़ाई हुई है। मतदान में सुबह के वक्त लंबी-लंबी लाइनें लगीं और बुजुर्ग मतदाताओं में भी उत्साह दिखा किंतु दोपहर बाद मतदान तो होता रहा किंतु मतदाताओं की लाइनें कम देखी गयीं।

नगरीय निकाय चुनाव के आज अंतिम चरण के रण में 26 जिलों की 233 नगरीय निकायों के लिए 94 लाख मतदाताओं ने 28135 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला रिजर्ब कर दिया है। चुनाव के लिए 1.58 लाख से अधिक मतदान कर्मी लगाए गए ।तीसरे चरण में पांच नगर निगम, 76 नगर पालिका परिषद व 152 नगर पंचायतों में चुनाव हुआ है। अंतिम चरण में आज सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर, मुरादाबाद, संभल, बरेली, एटा, फीरोजाबाद, कन्नौज, औरैया, कानपुर देहात, झांसी, महोबा, फतेहपुर, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी आदि जिलों में मतदान हुआ

कई स्थानों पर मतदान का कम प्रतिशत भी भाजपा के पक्ष में परिणाम को प्रभावित कर सकता है!ऐसे मतदाताओं की सूची बहुत लंबी है जो पंक्ति में मतदान के लिए खड़े रहे हैं किंतु जब मतदान का नंबर आया तो पता लगा कि सूची में से वोट ही नदारद हैं जबकि इन मतदाताओं ने पिछले नगरीय निकाय चुनाव में मतदान किया था ।सीतापुर में पूर्व एमएलसी भरत त्रिपाठी का नाम वोटर लिस्ट से गायब था। सूची में नाम न होने के कारण वोट नहीं डाल सके पूर्व एमएलसी।

जिला फिरोजाबाद में निकाय चुनाव के दौरान सबसे कम मतदान शिकोहाबाद में 47% हुआ जिसका मुख्य कारण मतदान लिस्ट से मतदाताओं के नाम गायब होना। यह जिम्मेदारी किसकी है। हजारों लोगों के लिस्ट में नाम ही नहीं थे। जिसके कारण उन लोगों ने मतदान नहीं कर पाया ।क्या यही लोकतंत्र है , जिसमें लोग अपना वोट ही नहीं डाल पाए । ज्ञान लोक विद्यालय संस्थान के प्रबंधक तथा समाज सेवी विकास राजपूत तथा डॉ मुनेंद्र शर्मा ने कहा है कि लोकतंत्र में मतदाताओं के नाम सूची से गायब कर दिया जाना निंदनीय है ।

प्रमुख मिष्ठान विक्रेता सोनू पंडित ने बताया कि जब सपरिवार मतदान करने गए तो लाइन में लगने के बाद पता लगा की उनका वोट सूची में नहीं है। जबकि सोनू का कथन है कि उन्होंने पिछले निकाय चुनाव में मतदान किया था।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी व्यापक तौर पर वोटर लिस्ट से नाम उड़ा दिए जाने की खबरों पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं ।इधर चुनाव में सत्तारुढ़ दल के अनेक प्रत्याशियों ने मतदाताओं से जन संपर्क करने में पूरी गंभीरता नहीं बरती है जबकि विपक्षी दलों के प्रत्याशियों ने जनसंपर्क करने में कोई कोई कोर कसर नहीं छोड़ी ।दरअसल भाजपा के सत्ता में होने के कारण भाजपा प्रत्याशी आवश्यकता से अधिक आत्मविश्वास पाले बैठे हैं ।

भाजपा प्रत्याशियों को कदाचित यह लगता है कि समाजवादी पार्टी औऱ बहुजन समाज पार्टी को एक सिरे से लगभग खारिज कर देने वाले मतदाताओं के एक बड़े वर्ग के पास भाजपा के अलावा और कोई विकल्प भी नहीं बचता ,शायद यही सोच भाजपा की रणनीति को थोड़ा हल्का कर सकती है।

दूसरी तरफ यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि जीएसटी के कारण व्यापारी वर्ग की खामोशी भी मतदान के प्रतिशत को कम करने की जिम्मेदार हो सकती है।</>

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