छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के विकास में पुलिस का योगदान : पैकरा

छत्तीसगढ़ के विकास में पुलिस का योगदान : पैकरा

रायपुर । प्रदेश गृहमंत्री की ओर से गुरुवार को अपने गृह, जेल और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की उपलब्धियों को पत्रकारों के सामने रखा गया। गृह मंत्री रामसेवक पैकरा ने कहा कि, छत्तीसगढ़ के विकास में पुलिस का योगदान है। राज्य में सुरक्षा का माहौल बना है। प्रदेश में जो भी आंदोलन, आयोजन या त्यौहार होते हैं व्यवस्था राज्य की पुलिस के जिम्मे होती है। लोगों का पुलिस प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है।

राज्य में 453 थाने और 113 चौकियां : सिविल लाईन स्थित न्यू सर्किट हाउस में उन्होंने पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने पुलिस विभाग की उपलब्धियां गिनाई। उन्होंने कहा कि, राज्य गठन समय प्रदेश में 293 पुलिस थाना और 57 पुलिस चौकी थी, जो अब बढ़कर 453 और 113 हो गई है। आज पुलिस विभाग का बजट 288 करोड़ से बढ़कर 3531.55 करोड़ हो गया। इस दौरान छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की वाहिनियों की संख्या 7 से बढ़कर 22 हो गई है। 14 वर्षों में राज्य में 4 पुलिस अधीक्षक कार्यालय भवन, 18 पुलिस लाईन प्रशासकीय भवन, 3 पुलिस कन्ट्रोल रूम भवन, 11 बटालियन मुख्यालय भवन, 228 थाना भवन, एसटीएफ के लिए 4 हब का निर्माण किया गया है।

नक्सलवाद से लड़ रहे लड़ाई : नक्सलवाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि, सरकार को 2003 में विरासत में नक्सलवाद मिला था। बस्तर में हम लड़ाई लड़ रहे हैं। सरगुजा में नक्सलवाद समाप्त हुआ है। सरकार की मंशा है कि 2022 तक प्रदेश नक्सलवाद से मुक्त होगा। सीआरपीएफ में बस्तरिया बटालियन से स्थानीय युवाओं को मौका मिल रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के पुलिस कर्मियों के वेतन और भत्ते में बढ़ोत्तरी की गई है। वीएनएस के सवाल पर कि प्रदेश में 14 वर्षों के विकास के बावजूद बस्तर संभाग में नक्सलियों से लड़ाई लड़ता जवान जब घायल होता है तो उसे रायपुर रेफर किया जाता है, क्यों अब तक ऐसा अस्पताल नहीं बना सके जो जवानों को ईलाज मुहैय्या करा सके। उन्होंन जवाब में दिया कि इलाका नक्सलवाद से प्रभावित है, इस ओर भी कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि, महिलाओं की सहायता के लिए वन स्टॉप सखी सेंटर की स्थापना की गई है। राज्य के 4 बड़े जिलों में क्रमश: बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और सरगुजा में महिला थाना स्थापित है। वहीं प्रदेश में 2003 में 26 जेल थी जिसे बढ़ाकर 33 कर दिया गया है। इसमें प्रदेश में 5 केन्द्रीय जेल, 12 जिला जेल और 16 उप जेल हो गई।

प्रहरी भर्ती और प्रशिक्षण केन्द्र के बारे में उन्होंने कहा कि, राज्य गठन के बाद प्रदेश में कोई प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित नहीं था। वर्तमान में प्रदेश की 5 केन्द्रीय जेलों में अलग-अलग नवीन जेल प्रशिक्षण केन्द्र का निर्माण किया गया। इन प्रशिक्षण केन्द्रों में विभाग के जेल कर्मियों को आधारभूत प्रशिक्षण और प्रत्यास्मरण प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभाग के आधुनिकीकरण के बारे में बताते हुए उन्होंने वीडियो कान्फ्रेंसिंग, जेल में एसटीडी पीसीओ, सीसीटीवी, सोलर सिस्टम, बायोगैस, बंदी पुर्नवास और कल्याण, स्वास्थ्य और स्वच्छता की जानकारी दी।

नगर सेना और आपातकालीन सेवा के बारे में गृहमंत्री ने बताया। उन्होंने कहा कि, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के अंतर्गत 7 टीमों का गठन किया गया है। एसडीआरएफ के जवानों को एनडीआरएफ के जवानों की ओर से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अग्रिशमन विभाग की गाडिय़ों के कंडम हालात के बारे में उन्होंने कहा कि, कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर डीजीपी एएन उपाध्याय, डीजी नक्सल डीएम अवस्थी, एडीजी विज, डीजी होमगार्ड गिरधारी नायक सहित पुलिस के आला अधिकारी मौजूद थे।

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