अधिग्रहित जमीन और पुनर्वास ग्रामो की समस्या को लेकर होगा महासम्मेलन

अधिग्रहित जमीन की वापसी, पुर्नवास गांव की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर 2 फरवरी को होगा महासम्मेलन

कोरबा : पुर्नवास गांव की समस्याओं और विकास कार्यों के साथ 40 साल पूर्व अधिग्रहित जमीन की वापसी ,प्रबंधन द्वारा प्रदत्त जमीन का भूस्वामी अधिकार पट्टा, गांव के बेरोजगारों की लंबित नॉकरी ,वैकल्पिक रोजगार, जिला खनिज न्यास निधि के तहत दी जाने वाली सुविधाओं, भुविस्थपित प्रमाण पत्र, पर चर्चा कर आगे की रणनीति बनाने के लिए छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में 25 गांव के किसान गंगानगर में एकजुट हुए.

बैठक को संबोधित करते हुए किसान सभा के संयोजक प्रशांत झा ने कहा कि देश की विकास के नाम पर अपनी गाँव और जमीन से बेदखल कर दिए गए विस्थापित परिवारों की जीवन स्तर में सुधार होने के बजाय और भी बुरा हाल हो चूका है । आज से लगभग 30 से 50 साल पूर्व कोयला उत्खनन करने के लिए किसानों की हजारो एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया था । कोयला खदानों के अस्तित्व में आ जाने के बाद विस्थापित किसानों और उनके परिवारों की सुध लेने की किसी भी सरकार और खुद एसईसीएल प्रबंधन के पास समय ही नहीं रहा ।

पूनर्व्यवस्थापन की शर्तों को पूरी तरह से नकार कर विकास की जो नींव रखी गयी उसमे ऐसे परिवारों की अनदेखी कर दिया गया जिसके कारण उनके समक्ष रोजी-रोटी की समस्या के साथ ही पानी, बिजली, सड़क ,चिकित्सा , शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी उनको मरहूम रखा गया है । खानापूर्ति के लिए बसाहट दिए जाते समय थोड़ा बहुंत कार्य ही किया गया अब इन इलाकों में परिवार की बढ़ती संख्या के साथ ही समस्या विकराल होते चले जा रही है । किसी गाँव को दूसरे जगह बसाहट दिए जाते समय इस बात का ख्याल रखा गया था कि गाँव की मूल सांस्कृतिक सरंचना बनी रही उसे भी अब दूसरे गाँव की बसाहट देने के नाम पर उजाड़ा जा रहा है । बैठक में उपस्थित किसानों ने कहा कि बन्द खदानों की जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया गया किन्तु उस जमीन पर खदान का विस्तार नहीं हुआ और आज भी अधिकतम जमीन पर किसान पूर्ववत काबिज रहकर खेती किसानी के अपने मुख्य व्यवसाय कर रहे हैं जिसे सरकार को कानून में बदलाव कर किसानों को वापस कर दिया जाना चाहिए बल्कि खदानों की बेकार पानी को खेतों तक पहुंचाकर कृषि को उन्नत तरीके से पैदावार बढाने तथा इससे रोजगार के अवसर देने के लिए उपयोग में लाने की जरुरत है ।

इन्ही सब् बिंदुओं के आधार पर पुनर्वास ग्रामो के विस्थापित परिवारों को एकजुट करने का बीड़ा उठाया गया है उन्हें संगठित कर उनके अधिकारों को दिलाने के लिए प्रयास तेज किया जायेगा । बैठक में किसान सभा के संयोजक प्रशांत झा ने उद्योगों में 40 साल पहले अर्जित किसानों की जमीन वापसी, पानी व प्रदूषण की गहराते संकट, विस्थापित काबिज परिवारों को जमीन व आवासीय पट्टा, पुर्नवास गांव में बुनियादी सुविधा ,विस्थापित परिवार को उद्योगों में80%रोजगार की गारंटी, सेंटल व डी ए वी विद्यालय में भुविस्थपितो को मिले आरक्षित कोटा, निशुल्क मेडिकल सुविधा की मांग का प्रस्ताव रखा जिसे उपस्थित 25 गांव के किसान प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से पारित किया किसानों ने भुविस्थापित व विस्थापन से जुडी समस्याओं पर कानूनी व सड़क पर संघर्ष तेज किए जाने का संकल्प लिया.

प्रस्ताव को लेकर सभी विस्थापित और अधिग्रहण से प्रभावित गांव में इन मांगों के अलावा गांववार समस्याओं के लिए बैठक कर माँगपत्र एवं हस्ताक्षर अभियान चलाकर 2 फरवरी को गंगानगर में महासम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया साथ ही समस्याओं से स्थानीय विधायक, राजस्व एवं पुर्नवास मंत्री ,मुख्यमंत्री से मिलकर समस्या की समाधान करने की मांग रखने का निर्णय लिया गया बैठक में प्रमुख़ रूप से जनक दास, धनबाई,दिलहरण बिंझवार, नवल कंवर,नंदलाल ,जवाहर सिंह, प्रताप सिंह, इंद्रपाल,भानू प्रताप ,समार सिंह, रामेश्वर,रामलाल,विजय सिंह, मुकेश सिंह, शत्रुहन दास,हुसैन नोहर,मोहपाल,समेत अन्य किसानों ने शामिल थे.

1
Back to top button