पुलिस की गलती से नाबालिग ने जेल में बिताए 15 साल

ओडिशा में पुलिस की एक गलती ने नाबालिग की जिंदगी खराब कर दी। नाबालिग को उसके अपराध के लिए सिर्फ तीन साल की सजा होनी थी लेकिन गलत चार्जशीट की वजह से अपराधी ने जेल में 15 साल बिताए।

शनिवार को ज्योति प्रकाश साहू कटक की चौदवार सर्कल जेल में 15 साल की सजा काटकर रिहा हुए। साहू को पुलिस की एक गलती की वजह से 15 साल सलाखों के पिछे रहना पड़ा क्योंकि आरोप पत्र में पुलिस ने उनकी उम्र गलत बताया था।

2002 में हत्या के प्रयास के लिए साहू को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। लेकिन पुलिस और उनके वकील ने इस तथ्य पर गौर नहीं किया कि वह अपराध के समय एक किशोर थे, और उन्हें सुधार गृह भेजा जाना चाहिए था।

शुक्रवार को, उड़ीसा हाईकोर्ट में साहू के बचाव के लिए उनके वकील ने बताया कि साहू की उम्र अभी 32 साल है और जब अपराध किया गया था तो वे किशोर थे। तब जाकर जजों ने इसे नोटिस किया और उनकी रिहाई के आदेश दिए।

जस्टिस आई महंत और के आर मोहपात्रा की खंडपीठ ने पता लगाया कि साहू को कटक में एक व्यक्ति पर गोलीबारी के लिए 28 नवंबर, 2002 को गिरफ्तार किया गया था, उस वक्त उनकी उम्र 17 वर्ष पांच महीने और 18 दिन थी। लेकिन आरोपपत्र में, पुलिस ने उनकी उम्र 20 साल के रूप में दर्ज किया था।
चार संदिग्धों में से तीन को मिल गई थी जमानत

साहू अपराध के लिए गिरफ्तार चार संदिग्धों में से एक थे और उन्हें जेल में भेज दिया गया था। चारों संदिग्धों को 2005 में कटक में एक अदालत ने दोषी ठहराया था। इसके बाद तीनों लोगों को जमानत दे दी गई लेकिन साहू को जमानत नहीं मिली क्योंकि वे मुख्य आरोपी थे।

किशोर न्याय अधिनियम से अनजान, साहू ने 2005 में उड़ीसा उच्च न्यायालय में सजा के खिलाफ अपील दायर की लेकिन पुलिस की गलती के आधार पर कभी भी यह अनुरोध नहीं किया।

साहू वकील राकेश मलिक ने कहा, ‘मैंने 2015 में मामला उठाया और दस्तावेजों का अध्ययन करते हुए पता चला कि मेरा मुवक्किल 2002 में नाबालिग था और उसे एक किशोर के रूप में माना जाना चाहिए था। इसलिए मैंने उनकी तत्काल रिहाई के लिए एक याचिका दायर की, किशोर न्याय अधिनियम के तहत अधिकतम सजा तीन साल है, जबकि मेरे मुवक्किल ने बहुत अधिक साल जेल में बिताए हैं।’

यह स्पष्ट नहीं है कि साहू के पहले दो वकीलों को यह पता क्यों नहीं था। अदालत ने मलिक की याचिका पर ध्यान दिया और इस मामले की जांच के लिए किशोर न्याय बोर्ड को आदेश दिया। बोर्ड ने मैट्रिकुलेशन मार्कशीट और स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट की पुष्टि की, और साहू के स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल पर भी सवाल उठाया और अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा।

मलिक ने कहा, ‘रिपोर्ट के आधार पर, यह सत्यापित हुआ है कि अपराध के समय मेरा मुवक्किल एक किशोर था। इसलिए हाईकोर्ट ने तत्काल रिहाई का आदेश दिया।’

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